तीन नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं, अब चुनाव के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है। वहीं कोरोना वायरस की वजह अमेरिका में डाक से वोटिंग की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा हार के डर की वजह से डोनाल्ड ट्रंप की पोस्टल वोटिंग रोकने की चाल पूरी तरह के असफल होती नजर आ रही है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वो डाक सेवा को कमजोर कर रहे हैं ताकि विरोधी उनके खिलाफ मतदान ना कर सके। पहले भी कई बार ट्रंप अपने भाषणों में बोल चुके हैं कि अगर राष्ट्रपति चुनाव के लिए डाक के जरिए वोट डाले गए तो फर्जी वोट ज्यादा पड़ सकते हैं।
बता दें कि ट्रंप की ओर से नियुक्त किए गए पोस्टल सर्विस (यूएसपीएस) के पोस्ट मास्टर जनरल (पीएमजी) लुइस डीजॉय ने मंगलवार को वो सारे बदलाव रद्द कर दिए जो वो लागू करना चाहते थे। लुइस डीजॉय ने देशभर से खास तौर पर स्विंग स्टेट्स में पोस्ट ऑफिस में प्रोसेसिंग उपकरण और जगह-जगह लगे नीले रंग के पोस्टल कलेक्शन बॉक्स हटाने का आदेश दिया है।
उन्होंने ये भी कहा था कि सभी मेल संबंधी प्रक्रियाएं बंद की जाएंगी और कर्मचारियों के ओवरटाइम पर पाबंदी लगाई जाएगी। इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ट्रंप के इस फैसले से ट्रंप के खिलाफ पड़ने वाले वोट कम हो जाएंगे और जो पड़ेंगे वो समय से नहीं पहुंच पाएंगे।
17 अगस्त को यूएस कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पैलोसी इस विवाद के चलते कांग्रेस सदस्यों की छुट्टियां रद्द कर दी और उन्हें वापस बुलाने का आदेश जारी किया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि एक विधेयक पर सहमति हो सके और डीजॉय की ओर से किए जा रहे बदलावों को रोका जा सके।
कोरोना काल के दौरान माना जा रहा है कि 50 फीसदी वोटिंग डाक के जरिए होगी और डाक के जरिए समय पर मतदान पहुंचाने की जिम्मेदारी यूएसपीएस के अलावा किसी और के पास नहीं होगी। टेक्सास, विंस्कांसिन और मिशिगन जैसे कुल नौ राज्य हैं जो चुनावी बिसात को पलट सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर स्विंग मतदातओं की संख्या ज्यादा है, जो किसी भी पार्टी के कट्टर वोटर नहीं होते हैं।
इसके अलावा वो इलाके जहां अश्वेत ज्यादा है, वहां ट्रंप को मतदान मिलने की उम्मीद बहुत कम है। अगर डीजॉय का नियम लागू कर दिया जाता है तो पोस्ट बॉक्स हटा देने की वजह से विपक्ष को पड़ने वाले मतदान पड़ते ही नहीं है। अगर पड़ भी जाते हैं तो प्रोसेसिंग उपकरण हटा लेने के कारण डाक मतदानों की शॉर्टिंग में क्लीयरेंस में देरी होती है। इसका परिणाम यह होता है कि ये मतदान समय से काउंटिंग के लिए नहीं पहुंच पाते।
कोरोना वायरस की वजह से यहां अश्वेत, गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों में एक बड़ा हिस्सा लाइन में खड़े रहने की इच्छा नहीं जता रहा है, जिसके फलस्वरूप डोनाल्ड ट्रंप को इसका फायदा मिल जाएगा। इधर डेमोक्रेटिक पार्टी का आरोप है कि ट्रंप ने चुनाव में हार के डर से डाक सेवाओं के फंड को रोके रखा है।
डेमोक्रेटिक पार्टी का आरोप है डीजॉय, ट्रंप के करीबी हैं और उनके लिए सबसे ज्यादा चंदा इकट्ठा करते हैं। इसके अलावा वो हाई-वे प्वाइंट नामक लॉजिस्टिक कंपनी के सीईओ भी रहे हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें पोस्टल सर्विस में एक दिन का अनुभव नहीं है।
विपक्ष का कहना है कि डीजॉय की नियुक्ति किसी साजिश से कम नहीं है क्योंकि ट्रंप यही चाहते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में अश्वेत नागरिकों के मतदान काउंटिंग तक ना पहुंच सके।