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प्रवासियों की जिंदगी गढ़ने वाली लेखिका भारती मुखर्जी नहीं रहीं

Fri, 03 Feb 2017 02:59 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
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अमेरिका में कई अवार्ड जीतने वाली भारतीय मूल की लेखिका भारती मुखर्जी का 76 वर्ष की आयु में मेनहट्टन में निधन हो गया। उन्होंने प्रवासियों के आंतरिक सांस्कृतिक टकराव पर कई कहानियां लिखीं, जिनमें से ‘दि मिडिलमैन’ को अमेरिका के शीर्ष साहित्यिक अवार्ड मिला। इसी तरह उनके लिख ‘जैस्मिन’ उपन्यास को पूरी दुनिया में सबसे अधिक सराहना और पुरस्कार मिले थे।
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भारत में कोलकाता में जन्मीं भारती मुखर्जी ने पूरी दुनिया में प्रवासियों की आवाज और समस्याओं को पुरजोर आवाज दी थी। उनके लेखक पति क्लार्क ब्लेज ने बताया कि वह गठिया और तनाव से उपजे हृदयरोग से पीड़ित थीं। भारती ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि - ‘प्रवासियों की कथा इस सहस्त्राब्दी का सबसे बड़ा महाकाव्य है।’ उनके अधिकांश उपन्यास और कहानियों में युवा महिलाओं को पुरुष प्रधान संस्कृति में दर्द के साथ गढ़ा गया है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में महिला चरित्र अक्सर यह सवाल करते हैं कि - ‘मैं कौन हूं’।

बिगड़ते सांस्कृतिक मूल्यों की तस्वीर उभारी
भारती ने भारत समेत इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड में स्कूली शिक्षा हासिल की और अमेरिका में रचनात्मक लेखन में एडवांस उपाधि ली। वह एक दशक से भी अधिक समय तक कनाडा में रहीं और बिगड़ते हुए सांस्कृतिक मूल्यों की आधुनिक सच्चाईयों का सामना करते हुए उसकी तस्वीर अपने लेखन में उभारी।
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पुरस्कृत रचनाएं

दि टाइगर्स डॉटर (1972)
वाइफ (1975)
डार्कनेस (1985)
दि होल्डर ऑफ द वर्ल्ड (1993)
डिजायरेबल डॉटर्स (2002)
दि ट्री ब्राइड (2004)
मिस न्यू इंडिया (2011)
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