अमेरिका में किसी ने भी अलास्का के किवालिना गांव का नाम नहीं सुना है। बेरिंग सागर के छोर पर रेत पर बसा ये गांव इतना छोटा है कि ये अमेरिका तो छोड़िए अलास्का के नक्शे पर भी नहीं दिखता है।
एक दशक के भीतर इस गांव के हमेशा के लिए जलमग्न होने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो इस गांव को ऐसे लोगों की जन्मस्थली के रूप में याद रखा जाएगा जो अमेरिका में जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे पहले विस्थापित हुए थे।
क़रीब चार सौ मूल इनुइट लोग किवालिना की एकमंजिला केबिन में रहते हैं। वे शिकार करके और मछली मारकर अपना गुजारा करते हैं।
समुद्र ने कई पीढ़ियों से उनको शरण दे रखी है लेकिन पिछले दो दशकों में आर्कटिक में बर्फ के पिघलने से इस गांव के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। बर्फ की मोटी दीवारें अब पतझड़ और सर्दियों में आने वाले तूफानों से इस गांव की सरहद को बचाने में सक्षम नहीं रह गई हैं। किवालिना का आकार लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
कामचलाऊ व्यवस्था
अमेरिकी सेना के इंजीनियरों ने साल 2008 में तट पर एक दीवार का निर्माण किया था लेकिन ये एक कामचलाऊ व्यवस्था थी।
दो साल पहले आए शक्तिशाली तूफान के कारण किवालिना के लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर जाना पड़ा था। इंजीनियरों का अनुमान है कि साल 2025 तक ये गांव रहने लायक नहीं रहेगा।
किवालिना की व्यथा औरों से अलग नहीं है। तापमान के रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि अलास्का के आर्कटिक क्षेत्र में गर्मी शेष अमेरिका की तुलना में दोगुनी तेज़ी के बढ़ रही है।
बर्फ के पिघलने, समुद्र का जलस्तर बढ़ने और तटीय इलाकों के क्षरण से इनुइट की तीन बस्तियों पर तत्काल खतरा मंडरा रहा है जबकि आठ अन्य बस्तियों का अस्तित्व भी खतरे में है।
इस समस्या की भारी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि किवालिना के बाशिंदों को दूसरी जगह बसाने पर 40 करोड़ डॉलर का खर्च आ सकता है। इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि ये धनराशि सरकारी खजाने से आएगी।
समस्या की कीमत
किवालिना के प्रधान कोलीन स्वान कहते हैं कि अलास्का के मूल निवासी उस समस्या की कीमत चुका रहे हैं जो उन्होंने खड़ी नहीं की है।
उन्होंने कहा, "अगर हम दस साल बाद भी यहां रहे तो हम बाढ़ में मारे जाएंगे या फिर दूसरी जगह चले जाएंगे। अमेरिकी सरकार ने हम पर पश्चिमी सभ्यता और अपनी समस्या लादी और अब वे चाहते हैं कि हम खुद ही सबकुछ उठाकर यहां से चले जाएं। ये किस तरह की सरकार है?"
किवालिना के उत्तर में कोई सड़क नहीं है और अलास्का का आर्कटिक टुंड्रा प्रदेश फैला है। अमेरिकी क्षेत्र के धुर उत्तर में बारो शहर स्थित है। ये वॉशिंगटन डी सी के बजाए उत्तरी ध्रुव के ज़्यादा क़रीब है।
बारो के अधिकतर लोग इनुपियाट क़बीले हैं। वे व्हेल और सील का शिकार करते हैं। लेकिन ये साल उनके लिए समस्याओं के घिरा रहा।
समुद्री बर्फ मार्च में ही पिघलनी और टूटनी शुरू हो गई थी। फिर ये दोबारा जम गई लेकिन ये इतनी पतली और कमजोर थी कि मछुआरे इस पर से अपनी नाव को नहीं घसीट सकते थे। इस तरह उनके शिकार का एक पूरा सत्र बर्बाद हो गया।
विज्ञान शहर
कई दशकों में ये पहला मौका था जब बारो में एक भी व्हेल नहीं पकड़ी गई। शहर के सबसे अनुभवी मछुआरों में से एक हरमन एहसोक कहते हैं कि सर्दियों में बर्फ तीन मीटर से भी मोटी होती थी लेकिन अब ये क़रीब एक मीटर रह गई है।
उन्होंने कहा, "अगर हमें अपना अस्तित्व बनाए रखना है तो खुद को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना होगा लेकिन इस साल कोई व्हेल नहीं मिलने का मतलब है कि इस बार सर्दियां बहुत लंबी होंगी।"
बारो के आर्कटिक का 'विज्ञान शहर' कहा जाता है। गर्मियों में दुनिया भर से कई शोधकर्ता यहां आकर आर्कटिक में बर्फ के पिघलने और टुंड्रा की परत के सिकुड़ने पर नज़र रखते हैं।
अलास्का का आर्कटिक इलाक़ा कार्बन आधारित जीवाश्म ईंधन का अहम स्रोत है और वैज्ञानिकों के मुताबिक़ जलवायु में बदलाव की यही सबसे बड़ी वजह है।
अलास्का का नॉर्थ स्लोप अमेरिका का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है और ट्रांस अलास्का पाइपलाइन की अमेरिका की तेल सुरक्षा में अहम भूमिका है। जैसे-जैसे मौजूदा तेल क्षेत्रों से उत्पादन घट रहा है वैसे-वैसे दूसरे इलाक़ों में उत्खनन की मांग बढ़ रही है।
महत्वाकांक्षी योजना
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं के विरोध के बावजूद शैल ने आर्कटिक के समुद्र में तेल उत्खनन की एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इस साल की शुरुआत में एक जहाज अलास्का के तट पर डूब गया था जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं।
लेकिन अलास्का का तेल भंडार इतना बड़ा है कि इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।
अलास्का ऑयल एंड गैस फेडरेशन की कार्यकारी निदेशक केट मोरियार्टी ने कहा कि अलास्का में 50 अरब बैरल तेल भंडार छिपा है।
उन्होंने कहा, "सच्चाई ये है कि आर्कटिक विकास की राह पर है। सवाल है कि इसमें कौन प्रमुख भूमिका निभाएगा? हम चाहते हैं कि अमेरिका ये भूमिका निभाए क्योंकि तेल एवं गैस की मांग कम होने वाली नहीं है।"
संभव है कि एक पीढ़ी के बाद आर्कटिक में गर्मियों में बर्फ देखने को न मिले। यहां तापमान बढ़ने की दर दुनिया में सबसे अधिक है।
संसाधनों के दोहन, जहाजों की पहुंच और मानव बस्तियां बसाने के लिए अलास्का आने वाले दिनों में एक आकर्षक क्षेत्र बन सकता है। लेकिन वैज्ञानिक इस मामले में सकारात्मक फीडबैक प्रभाव की बात करते हैं।