1950 के दशक में व्यापार के मंदिर कहे जाने वाले मॉल, अमेरिकी उपभोक्ता संस्कृति के प्रतीक के तौर पर सामने आए। मगर लगता है अब ये दम तोड़ रहे हैं।
शॉपिंग मॉल्स का मतलब भयावहता नहीं है। फिर भी 1977 में जॉर्ज रोमेरो ने हॉरर फ़िल्म 'डॉन ऑफ़ दि डेड' की शूटिंग एक सुनसान मॉल में की थी। लोगों की चहल-पहल और रोशनी से वंचित इन मॉल्स की बंद दुक़ानों में आवाज़ भयानक रूप से गूंजती है।
आज अमेरिकी उपनगरों में कंकरीट और इस्पात की ऐसी भीमकाय इमारतों की संख्या सौ से अधिक होगी, जहां अब वीरानी पसरी है।
दिलचस्पी घटी
ऑनलाइन शॉपिंग में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने और शहरों में ख़रीदारी के लिए दुक़ानों के नए रूप ने उपनगरीय मॉल्स के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। कई मॉल्स संपन्न हैं और इनका पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया है, लेकिन 'भूतिया मॉल्स' तेज़ी से 21वीं सदी की 'भूत नगरी' बनते जा रहे हैं।
शुरुआती मॉल्स नहीं बन पा रहे जिंदगी का हिस्सा
अमेरिका में शुरुआती मॉल्स का मतलब मीलों दूर से इनका दिखाई देना, वातानुकूलित गाड़ियां, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और हर समय बिजली की उपलब्धता होना भर नहीं था।
'शॉपिंग मॉल्स के जनक' कहे जाने वाले विक्टर ग्रुएन ने तब कुछ और कल्पना की थी। उन्होंने सोचा था कि इनके चारों ओर अपार्टमेंट, क्लीनिक, स्कूल और सुविधाएं होंगी और ये मॉल शहरी जीवन का अहम हिस्सा बनेंगे।
मॉल्स का इतिहास
विएना में 1903 में जन्मे विक्टर ग्रुएन पेशे से आर्किटेक्ट थे। ऑस्ट्रिया पर नाज़ियों के क़ब्ज़े के बाद 1938 में वे न्यूयॉर्क आए।
ग्रुएन ने अमेरिका के एडिना में आधुनिक दुनिया का पहला शॉपिंग मॉल डिज़ाइन किया जो 1956 में खुला।
ऐसा नहीं कि ख़रीदारी के लिए इतने बड़े केंद्र पहले बार खुले थे। ईसापूर्व पहली सदी में प्राचीन रोम में साउथडेल सेंटर में ट्रेजन मार्केट नाम के शॉपिंग सेंटर बने थे।
2007 में इन पर ब्रेक लगा
इस्तांबूल और दमिश्क में भी शॉपिंग मॉल से मिलती-जुलती इमारतें तैयार की गईं थीं। अमेरिकी मॉल्स इनसे अलग थे। ये चारों तरफ़ से बंद परिसर थे।
1990 के दशक के बीच अमेरिका में मॉल्स की जैसे बाढ़ आ गई। तब वहां एक साल में औसतन 140 मॉल बन रहे थे। मगर 2007 में इन पर ब्रेक लगा और अमेरिका में उस साल एक भी मॉल नहीं बना।
मंदी की मार
मंदी ने अमेरिका को पूरी तरह गिरफ़्त में ले लिया था। अब नए मॉल तो दूर, पुरानों के बंद होने का सिलसिला शुरू हो गया। वर्जीनिया के चेस्टरफ़ील्ड का 35 साल पुराना क्लोवरलीफ़ मॉल जब 2007 में बंद हुआ तो पर्यवेक्षकों ने पाया कि 1970 और 1980 के दशक में परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय क्लोवरलीफ़ मॉल से 1990 के दशक में लोग किनारा करने लगे थे।
क्लोवरलीफ़ के नियमित ग्राहक और महिलाएं मॉल से दूर रहने लगीं और वजह थी युवाओं का जमघट। दुनिया का सबसे बड़ा मॉल चीन में साउथ चाइना मॉल है।
शॉपिंग मॉल ने 1950 के दशक के सुखवादी और अमेरिकी मासूमियत वाला माहौल खो दिया था। मॉल्स का ढांचा इस क़दर विशाल था कि इन्हें दूसरे उपयोग में लाना आसान नहीं था। आज दुनिया का सबसे बड़ा मॉल चीन के डॉन्गगुआन में साउथ चाइना मॉल है। इसका फ़्लोर एरिया रोम के सेंट पीटर्स से 20 गुना और अमेरिका के सबसे बड़े मॉल किंग ऑफ़ प्रशिया से दोगुना है।
दुनिया के 10 बड़े मॉल्स में दो ईरान में हैं और बांग्लादेश में भी एक मॉल है जो किंग ऑफ़ प्रशिया मॉल से कहीं बड़ा है।