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क्या आप है अपने बॉस से परेशान, ऐसे निपटें तानाशाह बॉस से?

Wed, 16 Mar 2016 01:28 PM IST
बीबीसी/लंदन
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ऐसे निपटें तानाशाह बॉस से? - फोटो : BBC
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हम या हमारे दोस्तों का कई बार बड़बोले, तानाशाह सरीखे बॉस से पाला पड़ जाता है। जो शेखी बघारने के उस्ताद होते हैं। अपने आगे किसी को समझते नहीं। किसी की सुनते नहीं। बस अपनी मनमर्जी दूसरों पर थोपते रहते हैं। करियर में हम सभी का ऐसे बॉस से सामना हो ही जाता है, जिनकी नजर में उनसे बेहतर, उनसे काबिल कोई होता ही नहीं। सवाल यह है कि ऐसे बॉस से निपटा कैसे जाए? प्रोफेशनल्स की वेबसाइट लिंक्डइन पर जब हमने इस सवाल का जवाब तलाशा, तो दो एक्सपर्ट्स ने अपने तजुर्बे और अपनी राय साझा की।
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ऐसे ही एक्सपर्ट डेनियल गोलमैन ने एलेन नाम के एक मैनेजर का क़िस्सा बताया। एलेन को उनके मातहत मिस्टर डिक्टेटर कहते थे। एलेन का अपने विभाग पर फ़ौलादी शिकंजा था। हर छोटा-बड़ा फैसला वह खुद करता था। उसका इतना खौफ था कि मातहत उसके सामने जुबान खोलने से डरते थे। कभी मशविरा नहीं दे पाते थे।



तमाम रिसर्च से यह बात साबित हो चुकी है कि ऐसे तानाशाह बॉस के अंदर काम करने वाली टीम का काम बहुत अच्छा नहीं होता। बॉस के तानाशाही रवैये के चलते, उसकी टीम का फोकस काम से ज्यादा ध्यान नौकरी बचाने के जोड़तोड़ में रहता है।  लेकिन, गोलमैन कहते हैं कि ऐसे बॉस के बर्ताव पर काबू पाया जा सकता है। उसमें बदलाव किया जा सकता है। गोलमैन ने लेखक डेनियल सीगल के हवाले से ऐसे बॉस के किरदार को समझाने की कोशिश की है।
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वे बताते हैं कि हर इंसान को तीन बातों की जरूरत होती है। पहला यह कि सबका ध्यान उस पर रहे। दूसरा यह कि सब उसकी खुशामद करें, तारीफ करें, चापलूसी करें। और सबसे बढ़कर यह कि ये सब करते वक्त वो खु को महफूज महसूस करे। तो जब बॉस के इर्द-गिर्द लोग मंडराते नहीं, खुशामद नहीं करते तो उसे असुरक्षा का अहसास होने लगता है। फिर उसका बर्ताव तानाशाही हो जाता है।

गोलमैन कहते हैं कि ऐसे खुदगर्ज तानाशाही रवैये वाले बॉस को बदलने से पहले उससे दो सवाल पूछने होंगे। पहला यह कि क्या उन्हें दूसरे की राय से फर्क पड़ता है? दूसरा यह कि क्या वो बदलना चाहते हैं? अगर वो बदलना चाहते हैं तो, उन्हें सबसे पहले अपना नजरिया बदलना होगा। दूसरे उनके बारे में क्या राय रखते हैं, वो ईमानदारी से उसे सुनें-समझें। सबसे करीबी साथी की राय इस मामले में सबसे अहम हो सकती है। फिर ऐसे मैनेजर्स के लिए किसी रोल मॉडल की तलाश करनी होगी। ऐसे शख्स की जिससे खुद बॉस का अपने करियर में साबका पड़ा हो। जिसके काम करने के तरीके का उस पर गहरा असर हो। जिसके काम को खुद तानाशाह बॉस पसंद करता हो। इस रोल मॉडल के हवाले से तानाशाह क‌िस्म के बॉस को बदलने के लिए समझाया जा सकता है। आख‌िर में गोलमैन कहते हैं कि किसी भी बड़बोले बॉस को बदला जा सकता है। उसके लिए देर नहीं हुई होती, बशर्ते वो खुद बदलने के लिए तैयार हों। इस बारे में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर बिल जॉर्ज ने भी काफी दिलचस्प बातें लिखी हैं।



वे कहते हैं कि आज मीडिया की सुर्खियां घमंडी, बड़बोले नेताओं की हरकतों से अटी पड़ी होती हैं। वैसे भी नेताओं की फ‌ितरत, किसी के अहसास की परवाह न करने की होती है। और आजकल तो मानो बड़बोले नेताओं का ही जमाना है। वो इसके लिेए अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प की मिसाल देते हैं। जॉर्ज कहते हैं कि अच्छे टीम लीडर को अपनी काबिलियत, अपनी कमजोरियों का अच्छे से अहसास होता है। साथ ही वह अपने साथ काम करने वालों की अच्छाइयों-बुराइयों से वाकिफ होते हैं। उन्हें ये भी अच्छे से पता होता है कि जिस संस्थान में वह आज काम कर रहे हैं, वो उनसे किसी बेहतर इंसान ने अपनी मेहनत और लगन से खड़ा किया है। उस परंपरा को निभाने की ज‌िम्मेदारी का भी उन्हें अच्छे से अहसास होता है। ऐसे टीम लीडर, अपने बर्ताव में हमेशा नरमी रखते हैं। ऐसी विनम्रता जो सबको दिखाई देती है, महसूस होती है।


जॉर्ज कहते हैं कि आज इसी बर्ताव में नरमी की कमी दिखती है लोगों में। इसी बात को लोग समझ नहीं रहे हैं, या समझना नहीं चाहते। अक्सर लोग ख़ुद को बाक़ियों से बेहतर, ज़्यादा क़ाबिल मान लेते हैं। यहीं से उनकी विनम्रता ख़त्म हो जाती है। अगर लोगों को अपनी अच्छाइयों के साथ अपनी कमियों का भी अहसास हो, तो वह तानाशाही रवैया कभी नहीं अपनाएंगे। वो यह समझेंगे कि टीम लीडर होने का मतलब, अपने ग्राहकों, अपने मातहतों, अपने निवेशकों और समाज की सेवा करना है। जॉर्ज कहते हैं कि तानाशाही लोगों को ख़ुद के मोल का सही तरीक़े से अहसास ही नहीं होता। ऐसे लोग अक्सर शेखी बघारते दिखते हैं। यह उनकी खुद के बारे में असुरक्षा की भावना दिखाती है। बाहर से तो वो दूसरों को डराते-धमकाते हैं। लेकिन, भीतर ही भीतर उन्हें यह डर खाए जाता है कि कहीं कोई उनका ताक़तवर होने का मुखौटा न उतार फेंके। इससे उनकी कमज़ोरी, नाकाबिल होने की सच्चाई दुनिया के सामने आ जाएगी।
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