बचपन में हिंसा, दर्दनाक घटना और कमजोर सामाजिक आर्थिक स्थिति का अनुभव मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे किशोरावस्था में आंतरिक विकार जैसे अवसाद, बेचैनी और बाहरी मनोवैज्ञानिक विकार जैसे ध्यान में कमी, अतिसक्रियता की आशंका बढ़ जाती है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और फेडरल स्कूल ऑफ साओ पाउलो ने हालिया शोध में यह दावा किया है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक मनोवैज्ञानिक विकार के लक्षण वाले किशोरों में से 60 प्रतिशत ने बचपन में हिंसा की एक न एक घटना का अनुभव जरूरी किया था। शोध के लिए ब्राजील के साओ पाउलो के एक शहरी और एक ग्रामीण इलाके के 180 बच्चों का अध्ययन किया, जिनकी उम्र 12 साल थी।
मुख्य शोधकर्ता सिल्विया मार्टिस के मुताबिक करीब एक चौथाई (22 प्रतिशत) बच्चों में मनोवैज्ञानिक विकार पाया गया। इसमें से ज्यादा अवसाद और ध्यान में कमी-अतिसक्रियता के मरीज सबसे ज्यादा थे। क्रमश: 9.5 प्रतिशत और नौ प्रतिशत। इसके बाद छह प्रतिशत बेचैनी के शिकार थे। ब्राजील के मनोरोग जनरल में यह शोध प्रकाशित हुआ है।