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कांटों भरी राह पर चलेंगे अमेरिका के नए विदेशमंत्री

Fri, 03 Feb 2017 09:08 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
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अमेरिका की बड़ी तेल कंपनी एक्सॉन मोबिल के सीईओ रैक्स टिलरसन के नाम पर सीनेट की अंतिम मुहर लगने के बाद उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। अमेरिकी राजनयिकों के प्रमुख का कामकाज संभालने के पहले ही टिलरसन के सामने सात मुस्लिम देशों पर लगे प्रतिबंध, रूस व यूरोपीय मित्र देशों से संबंधों में संतुलन, मैक्सिको दीवार और अमेरिकी ब्यूरोक्रेटों के कांटे उनके रास्ते में चुनौती बनकर बिखरे पड़े हैं।
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सीनेट में 64 वर्षीय टिलरसन के नाम की पुष्टि 43 के मुकाबले 56 मतों से की गई। टिलरसन को रूस के साथ संबंधों के कारण विरोध का सामना भी करना पड़ा। 2013 में उन्हें रूस की संसद ‘क्रेमलिन’ ने ‘ऑर्डर ऑफ फ्रैंडशिप’ से पुरस्कृत भी किया था। इस कारण व्हाइट हाउस व रिपब्लिकन सांसदों ने भले ही इस शीर्ष राजनयिक की नियुक्ति का स्वागत किया हो, लेकिन डेमोक्रेट सांसदों ने उनके नाम का विरोध किया। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके शपथ समारोह में माना कि - ‘टिलरसन को पश्चिम एशिया और दुनिया भर की चुनौतियां विरासत में मिली हैं, लेकिन मेरा मानना है कि हम इस अत्यंत संकटग्रस्त समय में शांति एवं स्थिरता हासिल कर सकते हैं।’  
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सीनेट में उनके नाम की पुष्टि संबंधी सुनवाई में भी उन्होंने पुतिन को युद्ध अपराधी कहने से इंकार कर दिया था। टिलरसन के नाम की पुष्टि पूर्व विदेश मंत्रियों की तुलना में अधिक विवादास्पद रही। टिलरसन के सामने मौजूद चुनौतियों में से सबसे बड़ी चुनौती सात मुस्लिम बहुल देशों से आव्रजन या यात्रा पर रोक संबंधी ट्रंप के आदेश से विदेश मंत्रालय में पैदा हुई आशंकाओं का निराकरण करना है। 

उन पर प्रभावित देशों और नाराज यूरोपीय नेताओं के साथ दोबारा संबंध स्थापित करने की जिम्मेदारी भी होगी। इसके अलावा मैक्सिको दीवार को लेकर पनपने वाले विरोध और इस्राइल संबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की चुनौतियों का सामना भी उनके रास्ते में कांटे बिखेरे खड़ा है।
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जब अमेरिकी संसद में टिलरसन के नाम पर उठे विरोध के सुर

अमेरिकी सीनेट में जिस वक्त रैक्स टिलरसन के नाम पर अंतिम मुहर लगनी थी तब रूस के साथ निकटता को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध दर्ज कराया। सीनेटर एलिजाबेथ वारेन ने कहा कि - ‘रूस के साथ टिलरसन के व्यापक और लंबे समय से संबंधों’ का मतलब है कि अमेरिका अपने हितों के लिए उन पर विश्वास नहीं कर सकता। अन्य सीनेटर डिक डर्बिन ने कहा कि ‘राष्ट्रपति पुतिन के साथ टिलरसन के व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों की वजह से मुझे यह विश्वास नहीं है कि वह रूस के साथ अमेरिका के व्यवहार में प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे।’

अब कुवैत ने लगाया पाकिस्तान समेत 5 मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 7 मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब कुवैत ने भी पाकिस्तान समेत पांच मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध लगा दिया है। कुवैत ने पाकिस्तान, सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और ईरान मूल के निवासियों के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। कुवैत ने आतंकवाद को रोकने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। यानी अब पाक समेत पांच देशों के नागरिक कुवैत में भी प्रवेश नहीं कर पाएंगे।

स्पूतनिक न्यूज के मुताबिक इन पांचों देशों के साथ होने वाले पर्यटन, व्यापार और पर्यटक वीजा पर कुुवैत ने रोक लगा दी है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध लगाने से पहले कुवैत एकमात्र ऐसा देश था जिसने सीरियाई नागरिकों के प्रवेश को पहले से प्रतिबंधित कर दिया था। वर्ष 2011 में कुवैत ने सभी सीरियाई नागरिकों के वीजा को निरस्त करने का काम किया था।
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