एक तरफ चीन द्वारा भारत का साथ लेकर दुनिया में आगे बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है और दूसरी तरफ भारत का करीबी अमेरिका के चीन के साथ रिश्ते और कड़वे होते दिखाई दे रहे हैं।
अमेरिका ने चीन की 2025 योजना पर चिंता जताई है। इस योजना के तहत चीन आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर दुनिया के उद्योगों पर हावी होना चाहता है।
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने चीन द्वारा खुद को वैश्विक तकनीकी सांठगांठ के समूह में बदलने की योजना को ‘भयावह’ बताया है। अमेरिकी मंत्री ने अपने देश की बौद्धिक संपदा को चीन की इस रणनीति से बड़ा खतरा बताया है। तकनीकी चोरी पर पर वस्त्रोद्योग अधिकारियों के साथ हुई एक अहम बैठक में रॉस ने कहा, ‘यह एक बड़ी परेशानी है।’
रॉस ने आगे कहा, ‘ये समस्या दूर भी नहीं होने वाली है।’ उन्होंने साफ किया कि विकास योजना ‘मेड इन चाइना 2025’ का लक्ष्य अंतरिक्ष से दूरसंचार और दूरसंचार से रोबोटिक्स व इलेक्ट्रिक कारों तक ‘हर उद्योग’ पर हावी होना है।
उन्होंने कहा, ‘चीन दुनिया का फैक्टरी फ्लोर रहा है और अब दुनिया के लिए प्रौद्योगिकी क्षेत्र का भी केंद्र बनना चाहता है।’ विल्बर रॉस ने कहा कि चीन की यह योजना अमेरिका को बड़ी चुनौती देगी। यही नहीं बल्कि दुनिया के कई उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के साथ चीन का सहयोग बढ़ाने के लिए आगे बढ़ना भी अमेरिका के लिए मुसीबत साबित होगा।