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अमेरिका में है एक शहर जहां रहते हैं सबसे ज्यादा मुसलमान

Sun, 13 Dec 2015 05:03 AM IST
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
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अमरीका में एक तरफ तो इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ इन दिनों कुछ लोग जहर उगल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक शहर ऐसा है जहां स्थानीय नगर परिषद चुनावों के बाद मुसलमान बहुमत में आ गए हैं।
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ये है मिशिगन राज्य का हैमट्रैमिक शहर, जहां कभी पोलिश कैथोलिक समुदाय बहुमत में था लेकिन पिछले दो दशकों में उनकी आबादी अब मुश्किल से 10 प्रतिशत रह गई है। इस शहर के हर गली मोहल्ले में अब इस्लाम का असर दिखता है। बुर्के और हिजाब में लिपटी महिलाएं, स्कूल के बाद मस्जिद में कुरान की तालीम ले रहे बच्चे, शहर की मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जानेवाली पांच बार की अजान, अरबी और बांग्ला में लिखे दुकानों के साइनबोर्ड और हलाल खाना परोसने वाले रेस्तरां हर जगह नजर आते हैं।

साथ ही दिखती है पोलिश संस्कृति की भी छाप। शहर के बीचोंबीच पोप की मूर्ति है, गिरजाघर हैं, दीवारों पर पोलैंड की परंपरागत तस्वीरें हैं, शराबखाने हैं, साल में एक बार निकलने वाला रंगबिरंगा पोलिश परेड भी है। लेकिन कुछ लोगों को अब ये चिंता भी है कि इस्लाम इस शहर की पोलिश विरासत को खत्म कर देगा और स्थानीय चुनावों में मुसलमान बहुमत की जीत के बाद यह चिंता और बढ़ी है।
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उनमें से कुछ का कहना है कि अब सड़कों के नाम इस्लामिक देशों के नेताओं के नाम पर किए जा सकते हैं और दूसरी इस्लामी परंपराएं शहर पर लादी जा सकती हैं। जिस उम्मीदवार की जीत से परिषद में मुसलमान बहुमत में आए हैं उनका नाम है साद अलमासमारी। यमन से कुछ ही साल पहले अमरीका आकर बसे अलमासमारी का कहना है कि लोगों का डर निरर्थक है।

उनका कहना है कि उनके ज्यादातर वोटर मुसलमान जरूर थे पर वह पूरे शहर के प्रतिनिधि की तरह काम करेंगे। वह कहते हैं, "अगर कोई मेरे पास मदद मांगने आता है तो मैं यह नहीं पूछूंगा कि उसका मजहब क्या है। मैं तो सिर्फ यह पूछूंगा कि क्या आप इस शहर के नागरिक हैं? उसके बाद मैं उसकी समस्याओं के बारे में बातचीत शुरू कर दूंगा।"

अजान की आवाज से जनता है परेशान

शहर में सबसे बड़े मतभेद की जड़ है यहां की मस्जिदों से दिन के पांच बार गूंजने वाली अजान। सामाजिक कार्यकर्ता सूजन डन इस शहर में बरसों से रह रही हैं और लाउडस्पीकर्स से होने वाली अजान के खिलाफ आवाज उठाती रहती हैं। उनका कहना है कि उनके इलाके में अजान की आवाज काफी ऊंची है।

वह कहती हैं, "मैं अपने घर के अंदर होती हूँ, खिड़कियां बंद होती हैं, टीवी चल रहा होता है, तब भी अचानक अजान की आवाज घर के अंदर पहुँचने लगती है। यह मुझे पसंद नहीं है।" इस शहर में 2004 में काफी विवाद और झगड़े के बाद एक मस्जिद को अजान देने की कानूनी मंजूरी मिली थी। उसके बाद से शहर में कई मस्जिद हैं और सभी को अजान देने की आजादी है।

अल इस्लाह इस्लामिक सेंटर, जिसे सबसे पहले यह मंजूरी मिली, अब बगल की जमीन खरीदकर वहां एक मीनार भी बना रहा है, जहां से अजान दी जाएगी। मस्जिद के सेक्रेटरी मसूद खान कहते हैं कि पांचों अजान का वक्‍त मिलाकर भी देखें, तो मुश्किल से दिन के 15 मिनट बनते हैं।

वह कहते हैं, "वे लोग शिकायत करते हैं कि उनके सुकून में हम खलल डालते हैं। चर्च की घंटियां भी तो खूब शोर करती हैं? हम तो कभी शिकायत नहीं करते।

सबने अपनी अलग मस्जिदें भी बना रखी हैं

शहर के ज्यादातर मुसलमान यमन, बांग्लादेश और बॉस्निया से हैं और एक दूसरे की भाषा न समझ पाने से उनका आपस में मेलजोल भी कम है। यही वजह है कि सबने अपनी अलग मस्जिदें भी बना रखी हैं। शहर में मकानों की कीमत काफी कम है और स्थानीय जानकार कहते हैं कि बाहर से आए लोगों के लिए यह बड़ी वजह रही है यहां आकर बसने की।

पचास के दशक में कार उद्योग की वजह से फलने-फूलने वाला ये इलाका इन दिनों आर्थिक रूप से चरमराया हुआ है। यहां की सभी बड़ी फैक्ट्रियां बंद हैं। लोग या तो शहर से बाहर जाते हैं काम करने या फिर दुकानें और रेस्तरां चलाते हैं। कुछ इस्लामी संस्थाओं ने शहर के बीचोबीच बंद पड़ी बड़ी-बड़ी दुकानों की जमीन खरीद ली है।

शहर की मेयर कैरेन मायोस्की का कहना है कि मुसलमानों की बढ़ती संख्या से उन्हें कोई परेशानी नहीं क्योंकि शहर की आबादी में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है। उनका कहना है कि पोलिश लोगों से पहले यहां जर्मनी से आए लोग बहुमत में थे।

अब मुसलमान बहुमत में हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए लेकिन उनकी चिंता कारोबारी इलाकों में मस्जिदों की बढ़ती संख्या से है। कहती हैं, "मैंने इन इलाकों में गिरजाघरों को भी जगह नहीं दी थी। अब जैसे-जैसे यहां धार्मिक संस्थाएं बढ़ेंगी, शहर की दिक्कतें बढ़ेंगी। मैं शहर के आर्थिक विकास के लिए यहां और ज्यादा रेस्तरां और मनोरंजन की जगह खोलना चाहती हूं। अब यह संभव नहीं हो पाएगा।"
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चिंता कारोबारी इलाकों में मस्जिदों की बढ़ती संख्या है

राज्य के नियमों के अनुसार धार्मिक जगहों के आधे किलोमीटर के अंदर तक शराबखाने खोलने पर रोक लगाई जा सकती है और मायोस्की का कहना है कि ऐसे में रेस्तरां नहीं चल सकते। देखें तो इस शहर में मुसलमान और गैर-मुसलमान बरसों से साथ रहते आए हैं। कई बार बेमन से ही सही पर एक ही हवा में सांस लेते रहे हैं।

बांग्लादेश से बरसों पहले यहां आए मंजूर अहमद कहते हैं कि वो न्यूयॉर्क छोड़कर यहां आए क्योंकि यहां मुसलमान बनकर रहना आसान है। यहां वो स्थानीय मस्जिद में मुअज्जिन का काम करते हैं। लेकिन उनकी चिंता कारोबारी इलाकों में मस्जिदों की बढ़ती संख्या से है। कहती हैं, "मैंने इन इलाकों में गिरजाघरों को भी जगह नहीं दी थी। अब जैसे-जैसे यहां धार्मिक संस्थाएं बढ़ेंगी, शहर की दिक्कतें बढ़ेंगी। मैं शहर के आर्थिक विकास के लिए यहां और ज्यादा रेस्तरां और मनोरंजन की जगह खोलना चाहती हूं। अब यह संभव नहीं हो पाएगा।"

राज्य के नियमों के अनुसार धार्मिक जगहों के आधे किलोमीटर के अंदर तक शराबखाने खोलने पर रोक लगाई जा सकती है और मायोस्की का कहना है कि ऐसे में रेस्तरां नहीं चल सकते। देखें तो इस शहर में मुसलमान और गैर-मुसलमान बरसों से साथ रहते आए हैं। कई बार बेमन से ही सही पर एक ही हवा में सांस लेते रहे हैं। बांग्लादेश से बरसों पहले यहां आए मंजूर अहमद कहते हैं कि वो न्यूयॉर्क छोड़कर यहां आए क्योंकि यहां मुसलमान बनकर रहना आसान है। यहां वो स्थानीय मस्जिद में मुअज्जिन का काम करते हैं।
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