अमेरिका के रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा ने फैसला किया है कि अमेरिकी महिला सैनिकों को मोर्चे पर भेजने पर लगी रोक को हटाया जाएगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को ये जानकारी दी है। इस फैसले के बाद हजारों अमेरिकी महिलाओं के लिए मोर्चे पर तैनाती और विशेष कमांडों दस्तों में नियुक्ति के दरवाजे खुल जाएंगे।
इस तरह 1994 में बने उस नियम को पलट दिया जाएगा जिसके तहत महिलाओं की मोर्चे पर तैनाती की मनाही है। इस बारे में गुरुवार को औपचारिक तौर पर घोषणा की जा सकती है।
इस साल कुछ पद महिलाओं के लिए खोले जाने की उम्मीद है जबकि नेवी सील्स और डेल्टा फोर्स जैसी विशेष टुकड़ियों में तैनाती के लिए उन्हें अभी इंतजार करना होगा। लेकिन इस फैसले से महिलाओं के लिए मोर्चे पर दो लाख तीस हजार पद खुल जाएंगे।
फैसले का स्वागत
सीनेट की सशस्त्र समिति के अध्यक्ष कार्ल लेविन ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मैं इसका समर्थन करता हूं। इसमें 21वीं सदी के सैन्य अभियानों की वास्तविकता झलकती है।
महिला सैनिकों पर इन पाबंदियों में एक साल पहले उस समय ढील देने की शुरुआत हुई जब पेंटागन ने महिलाओं के लिए ऐसे 14,500 पद खोले जो लड़ाई के मोर्चे के नदजीक तैनाती से जुड़े थे।
नवंबर में चार महिलाओं के एक समूह ने मोर्चे पर तैनाती से जुड़े प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पर मुकदमा कर दिया था।
इराक और अफगान युद्ध के दौरान अमेरिकी महिला सैनिकों ने चिकित्सा कर्मी, सैन्य पुलिस और खुफिया अधिकारी के रूप में काम किए। कई बार उन्हें सैनिकों के साथ मोर्चे पर जाने का मौका मिलता था, लेकिन आधिकारिक रूप से उन्हें ये जिम्मेदारी नहीं दी गई।
इन लड़ाइयों में 2012 के दौरान 800 महिलाएं घायल हुईं और कम से कम 130 मारी गईं। 14 लाख सैनिकों वाली अमेरिकी सेना में 14 प्रतिशत महिलाएं हैं।