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वन चायना नीति पर पलटे ट्रंप, कहा सम्मान करेंगे

Sat, 11 Feb 2017 07:21 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में जीत के बाद चीन की वन चायना नीति पर संदेह जताते हुए इसे खत्म करने की वकालत की थी, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ फोन पर हुई लंबी चर्चा में उन्होंने अपने पुराने रुख से पलटी मार ली है। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति से हुई बातचीत में कहा है कि - ‘अमेरिका वन चायना नीति का सम्मान करेगा’। 
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व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा है कि ट्रंप और जिनपिंग के बीच कई मामलों पर बातचीत हुई और ट्रंप ने अपने चीनी समकक्ष के उस आग्रह पर सहमति जताई जिसमें उन्होंने वन चायना नीति का सम्मान करने की बात कही थी।

व्हाइट हाउस के मुताबिक यह बातचीत ‘बेहद ही सौहार्दपूर्ण’ रही और दोनों नेताओं ने एक दूसरे को उनके देश की यात्रा के लिए आमंत्रित किया। इससे पहले ट्रंप ने यह कह कर चीन के साथ तनाव बढ़ा दिया था कि जरूरी नहीं कि अमेरिका आगे भी वन चाइना नीति का सम्मान करता रहेगा। चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी ने कहा कि अंतत: ट्रंप समझ ही गई कि चीन कितना महत्वपूर्ण है।
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ट्रंप ने हाल ही में किया था चीन की वन चायना नीति का विरोध

नवंबर-16 में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतते ही ट्रंप ने चीन को बताए बिना ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन से प्रोटोकॉल के खिलाफ जाकर फोन पर बात की। इससे चीन चिढ़ गया और 14 नवंबर के बाद से चीन ने अब तक ट्रंप से कोई बात नहीं की। दरअसल, वन चाइना नीति के तहत जो भी देश चीन के साथ राजनयिक रिश्ते रखना चाहता है, उसे ताइवान के साथ अपने आधिकारिक संबंध खत्म करने होंगे। चीन उसे अपना एक प्रांत मानता है। अमेरिका ने 1979 में चीन को मान्यता देते हुए ताइवान से आधिकारिक तौर पर दूरी बना ली थी, जबकि अनौपचारिक रूप से दोनों से बीच अच्छे रिश्ते हैं।

ट्रंप ने अमेरिकी कारोबार पर चीन से किसी तरह की रियायत नहीं मिलने पर वन चाइना नीति को लेकर सवाल उठाए थे। ट्रंप ने कहा था कि ‘मैं वन चाइना पॉलिसी अच्छी तरह समझता हूं, लेकिन मुझे नहीं मालूम कि हम अब तक वन चाइना पॉलिसी से क्यों बंधे हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करके चीन अमेरिका को चोट पहुंचा रहा है जबकि हम उन पर कर तक नहीं लगाते हैं। चीन को ऐसा नहीं करना चाहिए।
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