ट्रंप प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर चीन पर अपनी मुद्रा युआन की कीमत घटाने का आरोप लगाने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर कृत्रिम तरीके से युआन की कीमत घटाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन आधिकारिक तौर पर चीन को ‘करेंसी मैन्यूपुलेटर’ कहने से इनकार करना उनका एक और यू टर्न माना जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के इस रुख को उन आधा दर्जन वाकयों में से एक माना जा रहा है, जब चुनाव अभियान के दौरान लगाए गए आरोप पर उसने यू टर्न ले लिया। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान ट्रंप लगातार यह कहते रहे थे कि वह युआन की कीमतें गिराने के आरोप में चीन को सजा देंगे। इस अभियान में ट्रंप ने नाटो को भी अप्रासंगिक करार दिया था।
लेकिन इस सप्ताह उन्होंने कहा कि नाटो का महत्व अब भी बरकरार है। इसी तरह सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के मामले में भी उन्होंने आश्चर्यजनक तरीके से पलटी खाई।
बहरहाल, शुक्रवार को ट्रंप ने प्रशासन ने संसद में पेश की गई अपनी छमाही रिपोर्ट में चीन, जर्मन, जापान, कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान को निगरानी सूची में रखा है। अमेरिका को लगता है कि ये देश अपनी-अपनी मुद्रा की कीमत कृत्रिम तौर पर घटा सकते हैं।