प्योंगयांग द्वारा हाल ही में किए गए अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) प्रक्षेपित करने से नाराज अमेरिका ने कहा कि उत्तर कोरिया को लेकर बात करने का समय अब खत्म हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने कहा, ‘सुरक्षा परिषद का आपात सत्र आयोजित करने का कोई मतलब नहीं है। उत्तर कोरिया द्वारा बार-बार किए जा रहे उल्लंघन को देखते हुए परिषद के एक और कमजोर प्रस्ताव से कुछ नहीं होने वाला है।’
उन्होंने कहा, ‘प्योंगयांग पर अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बढ़ाने वाले सुरक्षा परिषद के किसी अतिरिक्त प्रस्ताव का कोई अर्थ नहीं है। इससे उत्तर कोरिया के तानाशाह को यह संदेश जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनको गंभीरता से चुनौती देने के लिए तैयार नहीं है।
चीन को अब यह तय करना होगा कि उसे इस महत्वपूर्ण कदम को उठाना है या नहीं, बात करने का समय अब खत्म हो चुका है।’इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस मामले को लेकर चीन पर नाराजगी जता चुके हैं।
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने शुक्रवार को एक नई आईसीबीएम लॉन्च की थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मिसाइल अमेरिका के मुख्य भूभाग तक पहुंच सकती है। हेली ने चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से प्योंगयांग पर शिकंजा कसने की अपील की।
शिंजो-ट्रंप ने माना, ‘उत्तर कोरिया गंभीर और बढ़ता हुआ खतरा’
उत्तर कोरिया को लेकर ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने रविवार को बात की। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम ‘एक गंभीर और बढ़ता प्रत्यक्ष खतरा’ है।
व्हाइट हाउस ने कहा, ‘ट्रंप ने उत्तर कोरिया की ओर से एक अन्य आईसीबीएम प्रक्षेपण पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे से बात की। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि उत्तर कोरिया अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया व नजदीक और दूर के अन्य देशों के लिए एक गंभीर और सीधा बढ़ता खतरा पैदा कर रहा है।’
बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री अबे उत्तर कोरिया पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने और अन्य देशों से भी ऐसे ही कदम उठाने की अपील करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।