अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में कुछ जजों की ईमानदारी पर पहली बार सवाल उठे हैं। एक जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि आईसीजे के कम से कम 13 पूर्व और 7 मौजूदा जजों (कुल 20) ने अपने कार्यकाल में मध्यस्थ के रूप में काम किया है, जिनमें ब्रिटेन के जज क्रिस्टोफर ग्रीनवुड भी शामिल हैं।
कनाडा की संस्था इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआईएसडी) ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
इस रिपोर्ट में भारत के दलवीर भंडारी के खिलाफ कोई संकेत नहीं हैं। ग्रीनवुड हाल ही में भारत के दलवीर भंडारी के खिलाफ आईसीजे में जजों के दूसरे कार्यकाल के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा में शामिल रहे जिसमें अंतत: भंडारी की नियुक्ति हुई।
आईआईएसडी द्वारा जारी रिपोर्ट में इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि नौ साल के दूसरे कार्यकाल के लिए हाल ही में दोबारा निर्वाचित भारतीय न्यायाधीश दलवीर भंडारी ने कभी मध्यस्थ के बतौर काम किया हो।
जांच से संबंधित सूत्रों ने कहा कि न्यायमूर्ति भंडारी नैतिकता के आधार पर मध्यस्थता का कोई भी मामला अपने हाथों में लेते ही नहीं है।
जबकि ग्रीनवुड ने आईसीजे में अपने कार्यकाल में निवेश संबंधी कम से कम 9 मामलों में मध्यस्थ के तौर पर काम किया। इनमें से दो मामलों में उन्हें चार लाख डॉलर से अधिक की राशि भी दी गई।
आईआईएसडी के मुताबिक आईसीजे जजों को 90 मामलों में से 9 से 10 लाख डॉलर का शुल्क भी अदा किया गया। पूरी राशि का पता नहीं चला है क्योंकि मध्यस्थ शुल्क अमूमन निवेश संबंधी विवादों के निबटारे में यह उजागर नहीं होती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि निवेशक-राज्य विवाद निपटान (आईएसडीएस) मामलों के सार्वजनिक नहीं होने के कारण इनकी सही संख्या काफी अधिक भी हो सकती है।
आईसीजे के मौजूदा प्रमुख रॉनी अब्राहम और 5 पूर्व प्रमुख उन 20 जजों में शामिल हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मध्यस्थ के रूप में काम किया।
आईआईएसडी के आर्थिक कानून और नीति कार्यक्रम निदेशक नाथाली बर्नास्कोनी ओस्टरवाल्डर ने कहा कि हम उन अन्य जजों की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा रहे हैं जिन्हें इन कार्यों में शामिल किया जा रहा है, लेकिन इस बात से चिंतित हैं कि इससे अदालत की प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है।