संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर आतंकवाद का मुद्दा उठाया है। प्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए भारत ने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे गंभीर उल्लंघन बताया। भारत ने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्ति के खतरे के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने ‘मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट’ पर तीसरे समिति सत्र में कहा कि किसी स्थिति-विशेष से जुड़े मुद्दों में मानवाधिकार परिषद के कार्यों में आमसहमति की कमी एक चिंताजनक प्रवृत्ति है जिससे इसकी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता में कमी आती है। पॉलोमी ने कहा, ‘आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे गंभीर उल्लंघन है जो हमारी सीमाओं के परे से आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानवाधिकारों और निर्दोष लोगों की मौलिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग को रोकने के लिए आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ कार्रवाई करना चाहिए। संबंधित देश से परामर्श और सहमति के बिना आक्रामक और टकराव वाला दृष्टिकोण और घुसपैठ के तरीकों को अपनाना प्रतिकूल रहा है और इससे मानवाधिकार के मुद्दों का केवल राजनीतिकरण ही होता है।’
भारत ने मानवाधिकार परिषद को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सार्वभौमिकता, पारदर्शिता, निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता और रचनात्मक बातचीत के मौलिक सिद्धांतों के पालन को सशक्त बनाने के लिए कहा। भारत को पिछले महीने मानवाधिकार परिषद के लिए चुना गया था।