करीब एक करोड़ की आबादी और गगनचुंबी इमारतों का शहर न्यूयॉर्क इन दिनों ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने की जद्दोजहद कर रहा है। हालत यह है कि इस शहर में दो तिहाई बिजली यहां की इमारतों पर ही खप जाती है। 2050 तक इस शहर ने अपने ग्रीन हाउस उत्सर्जन को 80 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य रखा है, ताकि शहर को यहां के बाशिंदों के लिए और बेहतर बनाया जा सके। जिन लोगों ने इस चुनौती को स्वीकार किया है, उनमें ब्लॉक पॉवर नामक एक स्टार्टअप के तीस बरस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर थॉमस जॉर्ज भी हैं, जो कोशिश कर रहे हैं कि शहर के मध्य वर्ग वाले इलाके की इमारतों में बिजली बरतने के तौर तरीके बदले जाएं।
उनकी कंपनी ऐसे इलाकों की इमारतों में तेल के जरिये पैदा होने वाली बिजली को प्राकृतिक गैस की ओर मोड़ने के तरीके सुझा रही है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई करने वाले केरल के मूल निवासी थॉमस कहते हैं कि इन इमारतों में तेल के बजाए प्राकृतिक गैस से पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल करने से ही 40 फीसदी तक ऊर्जा की खपत बच सकती है। जाहिर है, इससे बिजली की लागत भी घट जाएगी। यदि भारत सड़क बिजली और पानी की मुश्किलों से जूझ रहा है, तो न्यूयॉर्क के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं, ट्रैफिक, प्रदूषण और कचरा प्रबंधन।
थॉमस की कंपनी 335 मैडिसन एवेन्यू की एक बहुमंजिला इमारत में स्थित उन सैकड़ों कंपनियों में से एक है, जो कि बिजली से लेकर परिवहन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। असल में शैशव अवस्था की कंपनियों को यह जगह द हब और न्यूयॉर्क सिटी इकोनॉमिक डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने मुहैया कराई है और साथ ही उन्हें नए निवेशक तलाशने के मौके भी दे रहे हैं। द हब, जैसा कि इसके एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रॉबिंसन हर्नेंडेज बताते हैं कि इन्क्यूबेटर की तरह है। यानी वह अंडे को सेने का मौका दे रहे हैं और जैसे ही चूजे बड़े होने लगते हैं, वह अपने दम पर काम करने लगते हैं। उनका दावा है कि उनसे जुड़ने वाले 94 फीसदी स्टॉर्टअप सफलता की राह पर हैं।
वह कहते हैं कि हम तो स्टार्टअप को न्यूयॉर्क के प्राइम लोकेशन में अपना पता दे रहे हैं! बेशक यहां भारत का अभी एक भी स्टार्टअप नहीं है। न्यूयॉर्क सिटी इकोनॉमिक डेवलमेंट कॉर्पोरेशन (एनवाईसीईडीसी) जेसन गूड बताते हैं कि वह सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों ही तरह की कंपनियों को मौके दे रहे हैं। उनके मुताबिक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के साथ ही न्यूयॉर्क की बड़ी चुनौती यहां पैदा होने वाला कचरा भी है। न्यूयॉर्क दुनिया के सर्वाधिक कचरा पैदा करने वाले शहरों में से एक है। इस तरह की हर चुनौती का साल्यूशन तलाशने के लिए एनवाईसीईडीसी जिस मॉडल पर काम कर रहा है उनमें इंजीनियरिंग कॉलेजों की बड़ी भूमिका है, क्योंकि वह युवा इंजीनियरों को नवोन्मेष के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यहीं अपने लिए संभावनाएं तलाश रहीं कनेक्टिंग थिंग्स की जूलिया फिलोट बताती हैं कि उनकी कंपनी ने एक बीकन बनाया है, जिसे शहर के प्रमुख जगहों पर लगाया गया है, जिसकी रेंज में आएं तो आपके मोबाइल फोन पर तुंरत पता चल जाएगा कि आपके लिए अगली बस कब आने वाली है। कहना मुश्किल है कि उनका यह बीकन बनारस के गदौलिया जैसे तंग इलाके में कितना काम करेगा।