अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी का कहना है कि अमेरिका के पास इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि पिछले महीने दमिश्क में तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली गैस सारिन का इस्तेमाल किया गया था।
उन्होंने कहा कि इस हमले में मारे गए लोगों के खून और बाल के नमूनों से इसके पाए जाने की पुष्टि हुई है।
अमेरिका सीरियाई सरकार पर शुरू से ही आरोप लगा रहा है कि उसने इन हमलों में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था।
इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीरिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात भी की है, लेकिन इसके लिए वो संसद की अनुमति लेना चाहते हैं।
सीरिया ने इन हमलों से इनकार किया है और कहा है कि वो किसी भी तरह के हमले का सामना करने को तैयार है।
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक इस बात की जांच करने के लिए दमिश्क पहुंचे थे कि वहां रासायनिक हमले हुए थे या नहीं। फिलहाल वो टीम नीदरलैंड में है जहां इकट्ठा किए गए नमूनों की जांच की जा रही है।
अरब लीग
वहीं अरब लीग ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वो सीरिया के खिलाफ कार्रवाई की बजाय उसे धमकाने की रणनीति अपनाएं।
काहिरा में अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में सीरियाई सरकार पर एक बार फिर पिछले महीने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया। अरब लीग के एक प्रवक्ता नासिफ हित्ती ने पत्रकारों को बताया कि अब कार्रवाई का समय आ गया है।
उनका कहना था कि हमने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा है। हमने ये भी कहा है कि ऐसे गंभीर अपराध करने वालों के खिलाफ जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि पिछले दो साल से हो रहे ऐसे हमलों पर विराम लग सके।
सबसे बड़ा हमला
पूर्वी दमिश्क में गत 21 अगस्त को सबसे बड़ा और खतरनाक हमला हुआ था। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस हमले में 1400 लोगों की मौत हुई थी।
अमेरिका का ये भी कहना है कि इस तरह के हमले की क्षमता सिर्फ सीरियाई सरकार में ही थी, विद्रोहियों में नहीं।
जॉन केरी का कहना है कि रासायनिक हमलों से संबंधित जो साक्ष्य मिले हैं, वो उनके स्रोतों के आधार पर मिले हैं, संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं के नहीं।
केरी का ये भी कहना था कि उन्हें यकीन है कि अमेरिकी संसद सीरिया पर कार्रवाई की अनुमति दे देगा। नौ सितंबर को इस मामले पर अमेरिकी संसद की दोबारा बैठक है।
इस बीच, सीरिया के उप विदेश मंत्री फैसल मेकडैड ने बीबीसी को बताया कि हमलों को टालने और कांग्रेस की अनुमति लेने का ओबामा का फैसला महज एक राजनीतिक स्टंट है और मीडिया की चाल है।
सीरियाई सरकार मार्च 2011 से विद्रोहियों से लड़ रही है। इस दौरान करीब एक लाख लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 17 लाख लोग शरणार्थी हो चुके हैं।