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उत्तर कोरिया की धमकी से ट्रंप प्रशासन में पैदा हुई खटास, राष्ट्रपति बोले- हम सब एक हैं

Fri, 11 Aug 2017 01:08 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस , ब्रिजवाटर, न्यूजर्सी
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Donald Trump
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उत्तर कोरिया को खाक करने के लिए दी गई आग और विध्वंस की चेतावनी के बाद ट्रंप प्रशासन में मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप की इस चेतावनी पर मिश्रित संकेत दिए हैं, क्योंकि विश्व बिरादरी से अलग-थलग किए उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अमेरिका को परमाणु युद्ध की धमकी दी है।
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हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस मसले पर हम सब एकमत हैं। विदेशमंत्री रैक्स टिलरसन ने कूटनीति पर जोर देते हुए अमेरिकियों को दोबारा आश्वस्त किया कि वे रात में निश्चिंत होकर सो सकते हैं,

जबकि रक्षामंत्री जिम मैटिस ने कहा कि उत्तर कोरिया ने अपने शासन का अंत करने और लोगों का विनाश करने की ठान ली है। ट्रंप की चेतावनी के बाद उत्तर कोरिया ने अमेरिकी द्वीप गुआम पर परमाणु मिसाइल से हमले की धमकी दी थी।
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इससे ट्रंप प्रशासन ऐसी स्थिति में आ गया है जिसने गतिरोध को दूर करने के लिए अशुभ संकेत बढ़ा दिए हैं, क्योंकि उत्तर कोरिया पहली बार अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों का सफलता परीक्षण कर लिया है।

विदेशमंत्री टिलरसन और रक्षामंत्री मैटिस ने भी ट्रंप की इस चेतावनी से पहले खतरे की समीक्षा करते हुए आग और विध्वंस जैसी बात की नहीं सोची थी। होनोलुलू स्थित पूर्व व पश्चिम केंद्र में एशियाई मामलों की विशेषज्ञ एलन एल. फ्रोस्ट ने कहा, मुझे नहीं लगता कि ट्रंप कि सी भी विषय पर स्थिर नीति की परवाह करते हैं।

राजनीतिक कसौटी पर आगे बढ़ रहे टिलरसन और मैटिस के बाद ट्रंप की चेतावनी अनावश्यक थी। डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने भी ट्रंप की चेतावनी की यह कहकर आलोचना की है कि उत्तर कोरिया को चेताने का यह सही समय नहीं है। 

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उत्तर कोरिया मामले पर सरकार में मतभेदों की रिपोर्टों को खारिज किया है। प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने कहा कि ट्रंप का पूरा प्रशासन उत्तर कोरिया से पैदा होने वाले खतरे व इससे निपटने के तरीकों को लेकर एकमत है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि आप में से कुछ इस बारे में असहमत हो सकते हैं लेकिन अमेरिका एकमत है। चाहे व्हाइट हाउस हो, विदेश मंत्रालय हो या रक्षामंत्रालय, सभी एक स्वर में बोल रहे हैं। हमने यही भाव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी देखा जहां एक सप्ताह पहले ही प्रस्ताव पारित हुआ है।
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