भारत की लगातार कोशिशों से आतंकवाद पर चौतरफा घिर चुका पाकिस्तान अब परमाणु युद्ध की धमकी पर उतर आया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने एक उकसाने वाले बयान में कहा है कि भारतीय सेना के ‘कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन’ का मुकाबला करने के लिए उसने छोटी दूरी के परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक कार्यक्रम में अब्बासी ने कहा कि पाकिस्तान ने सीमा के पास युद्ध क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती नहीं की है लेकिन भारत के कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन से निपटने के लिए उसने छोटी दूरी के परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं।
उसके सामरिक परमाणु हथियारों की तरह छोटी दूरी के गैर-सामरिक परमाणु हथियार भी सुरक्षित कमांड और कंट्रोल प्रणाली से नियंत्रित हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ में चले जाएंगे।
अमेरिका भी चिंतित
इस कार्यक्रम के संचालक डेविड सैंगर ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु शस्त्रागार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। यही नहीं, उत्तर कोरिया के अलावा अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित है।
इस पर अब्बासी ने कहा कि पाकिस्तान परमाणु क्षमता से संपन्न एक जिम्मेदार देश है। वह एशिया का पहला देश है जिसने 60 के दशक में परमाणु कार्यक्रम शुरू किया। उन्हें सुरक्षित रखने में पिछले 50 साल से उसका रिकॉर्ड बेदाग है। वह जानता है कि परमाणु कचरे से कैसे निपटा जाता है।
क्या है कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन
पाकिस्तान के साथ संभावित युद्ध का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना ने इस डॉक्ट्रिन को विकसित किया है। इसके तहत उसके खिलाफ परंपरागत युद्ध लड़ने के बजाय सीमित सैन्य हमले से उससे निपटने की रणनीति बनाई गई है।
परंपरागत युद्ध के लिए सेना को तैयार करने में बहुत ज्यादा समय लगता है। इस बीच दुश्मन को चौकन्ना होने का मौका मिल जाता है और तब तक युद्ध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ने लगता है।
2001 में संसद पर हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर हमले की योजना बनाई थी लेकिन इसकी तैयारी में ही एक महीने लग गए। तब तक भारत पर इतना अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ चुका था कि उसे कदम वापस खींचने पड़े थे।
उसके बाद ही कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन की नींव पड़ी। इसके तहत भारतीय सेना आदेश मिलने के 72-96 घंटे के अंदर हमला कर सकती है। भारत ने कभी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है लेकिन इस साल जनरल बिपिन रावत ने सेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद कहा था कि भविष्य के युद्ध सीमित होंगे, इसलिए हमें तेजी से हमले के लिए तैयार रहना चाहिए।
अब्बासी ने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया
अफगानिस्तान में भारत की भूमिका मंजूर नहीं
पाकिस्तान ने अमेरिका को धता बताते हुए अफगानिस्तान में भारत की राजनीतिक और सैन्य भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री अब्बासी ने कहा कि भारत की सक्रियता से अफगानिस्तान समस्या और जटिल हो जाएगी।
पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण एशिया नीति की घोषणा करते हुए पाकिस्तान को आतंकियों की पनाहगाह करार दिया था और अफगानिस्तान राजनीतिक और आर्थिक विकास में भारत की भूमिका को अहम बताया था।
भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को मुख्य मुद्दा बताते हुए अब्बासी ने कहा कि कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को लागू किए बिना इस समस्या का हल नहीं हो सकता है। इसके हल होने तक कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता रहेगा जैसा कि वह 1948 से कर रहा है।