जम्मू-कश्मीर को आजाद कराने के नाम पर पाकिस्तान ने उच्च स्तर पर आतंकी समूहों के साथ जो मिलीभगत की थी, आज उसी का हर्जाना उसे भुगतना पड़ रहा है। लाहौर पर हुए आतंकी हमले के बाद देश के एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि इतना सब कुछ होने के बाद भी पाक आतंकी समूहों के खिलाफ पूर्ण युद्ध की घोषणा नहीं कर रहा।
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हुसैन हक्कानी ने पाक की पोल खोलते हुए कहा कि शुरुआत में पाक ने आतंकी समूहों से जुड़ने की रणनीति अपने फायदे के लिए अपनाई। वह इसके जरिये अफगानिस्तान को प्रभावित करना चाहता था और भारत से जम्मू-कश्मीर को आजाद करना चाहता था, लेकिन उसका ये दांव उल्टा पड़ गया।
एक साक्षात्कार में हक्कानी ने कहा कि आतंकी समूहों का निशाना बनने के बाद भी पाक सरकार आतंकी समूहों पर कार्रवाई को लेकर संकुचित रवैया अपना रही है। यही वजह है कि ये जिहादी समूह शिया, अहमदी और ईसाई समूहों को निशाना बनाकर ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं और लोगों को अपने समूह में शामिल कर रहे हैं। पूर्व राजदूत ने कहा, ‘एक तरफ पाक सरकार पंजाब प्रांत में कुछ जिहादी समूहों को बचाने में लगी है और दूसरी तरफ, देश के दूसरे भागों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
आतंकियों के खिलाफ ये चयन का रवैया सही नहीं है। हक्कानी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना और नेता भारत के खिलाफ लड़ने की गलतफहमी का शिकार होकर आतंकी समूहों के साथ हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि वे इन समूहों के साथ मिलकर अपने नाकाम मंसूबों को पूरा कर सकेंगे, लेकिन होता ये है कि आतंकी समूह बंट जाते हैं और फिर पाक को ही भुगतना पड़ता है।