फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संयुक्त राष्ट्र से हिन्दी में समाचार का प्रसारण शुरू, ट्विटर एकाउंट भी खोला गया

Sat, 18 Aug 2018 04:56 PM IST
भाषा, पोर्ट लुई
विज्ञापन
विज्ञापन

हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दिलाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज कहा कि इस विश्व संस्था से हिन्दी में साप्ताहिक समाचार बुलेटिन का प्रसारण शुरू हो गया है और हिन्दी में एक ट्विटर एकाउंट भी खोला गया है। 

विज्ञापन


11वे विश्व हिन्दी सम्मेलन के दौरान उद्घाटन संबोधन में सुषमा स्वराज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र से हिन्दी में सप्ताहिक समाचार बुलेटिन का प्रसारण शुरू किया गया है । यह प्रतिदिन भी प्रसारित हो सकता है लेकिन इसके लिये दो वर्ष तक इसके प्रसारण को देखा जायेगा, रेटिंग तैयार की जायेगी और प्रतिक्रिया अच्छी होगी तब इसका दैनिक प्रसारण भी हो सकता है। 

उन्होंने कहा कि अब हम हिन्दी भाषी लोगों की जिम्मेदारी है, इसे बढ़ावा दें। उल्लेखनीय है कि अभी यह हिन्दी समाचार बुलेटिन प्रत्येक शुक्रवार को प्रसारित हो रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र में ट्विटर एकाउंट भी खोला गया है। इसके साथ ही वेबसाइट पर प्रमुख दस्तावेज हिन्दी में डाल दिये गए हैं । 
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि विश्व हिन्दी सचिवालय का स्थायी भवन बनकर तैयार हो गया है और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसका उद्घाटन कर चुके हैं । इसमें एक स्थायी अधिकारी को नियुक्त किया जा चुका है। सुषमा स्वराज ने कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दिलाने में कुछ बाधाएं हैं।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्रदान करने के लिए प्रस्ताव को दो तिहाई बहुमत से पारित करने के साथ समर्थन करने वाले सभी सदस्य देशों को इस पर होने वाले खर्च के लिए अंशदान करना होता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र में 129 देशों का समर्थन जुटाना कठिन काम नहीं है । हमने योग दिवस को मान्यता दिलाने में 177 देशों का समर्थन जुटाया है ।

विदेश मंत्री ने कहा कि लेकिन आधिकारिक भाषा के संदर्भ में सदस्य देशों को वोट से समर्थन देने के साथ आर्थिक खर्च भी साझा करना पड़ता है । अगर इसका पूरा खर्च भी हमें देना पड़े, तब भी हम इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैंने संसद में भी कहा था कि 40 करोड़ रूपये तो क्या 400 करोड़ रूपये खर्च लगेगा, तो देने को तैयार हैं । लेकिन संयुक्त राष्ट्र का नियम है कि समर्थन करने वाले देशों को ही व्यय बांटना होता है।

सुषमा स्वराज ने कहा कि यही स्थिति जर्मनी और जापान के समक्ष भी है । ये दोनों देश भी अपनी भाषा को इस विश्व निकाय की आधिकारिक भाषा बनाना चाहते हैं, लेकिन उनके समक्ष भी यही बाधा आ रही है । 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें