म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की ने अमेरिकी छात्रों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की रचनाओं को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही कहा कि गांधीजी और जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है।
सू की ने कहा कि गांधीजी, मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग और उनके पिता एवं राजनीतिक गुरु आंग सान सभी सिद्धांतवादी व्यक्ति थे। तानाशाह सैन्य शासक ने जब उन्हें घर में नजरबंद कर दिया तो खुद को अनुशासित रखने के लिए वे इनकी रचनाएं पढ़ा करती थीं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता सू की (67) ने कहा कि गांधी जी की रचनाओं ने उन्हें बहुत अधिक प्रेरित किया है। उन्होंने छात्रों से भी उन रचनाओं को पढ़ने का आग्रह किया। वर्षों तक नजरबंद रहने के दौरान उनकी प्रेरणा स्रोत कौन थे, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वास्तव में गांधीजी का व्यक्तित्व अद्भुत है।
मेरा मानना है कि आप उनके बारे में जितना अधिक पढ़ते जाएंगे, उतना ज्यादा प्रभावित होंगे। वे कौन और क्या थे, इन सवालों के जवाब भी आसानी से मिलते जाएंगे। लोकतंत्र समर्थक नेता ने कहा कि आपको याद होना चाहिए, अहिंसा के मार्ग पर चलकर बदलाव की बात गांधी जी से पहले किसी ने सोचा भी नहीं था। वे पहले व्यक्ति थे, जो इस मार्ग पर चले और दृढ़ निश्चय किया कि हिंसा के बगैर क्रांतिकारी बदलाव संभव है। भारत में पढ़ी सू की ने बताया कि नेहरू जी और उनके पिता के बीच काफी अच्छे संबंध थे।
‘सैनिकों के लिए नफरत की भावना नहीं’
सू की ने भले ही अपने जीवन के करीब 15 साल घर में नजरबंद रहकर बिताए हों पर म्यांमार के सैनिकों के लिए उनके मन में नफरत की भावना नहीं है। उन्होंने बताया कि मेरी परवरिश जिस माहौल में हुई, मुझे लगता था कि मैं सैन्य परिवार का एक हिस्सा हूं। मुझे अपने पिता के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं, तसवीरों में उन्हें सेना की वर्दी में देखा है। स्थिति काफी विषम लगती है कि पिता ने सेना की स्थापना की और बाद में सेना ने ही मुझे नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद अपने पिता के कारण मैंने जनरल से कभी नफरत नहीं की, हां उनके कार्यों से जरूर की।