पाकिस्तान के लिए इस खबर को पचा पाना आसान नहीं था कि जिस डोनाल्ड ट्रंप ने बाहरी मुस्लिमों को अमेरिका में घुसने से रोकने और आतंकवाद को पश्रय देने के लिए पाकिस्तान के साथ कड़ाई से पेश आने की धमकी दी थी, वही अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति होंगे। यह भारत के पड़ोसी देश के लिए चिंता और परेशानी के क्षण थे।
इसके बाद खुशी के क्षण आए, जब ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज को फोन पर बधाई दी और उनकी तारीफ की। यह दो सप्ताह पहले की बात है। ट्रंप ने 'बेहतरीन' और 'टेरेफिक' जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इस बातचीत में ट्रंप ने इशारा किया कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने में मदद की इच्छा रखते हैं।
चिंता और खुशी के क्षण अब गुम हो चुके हैं और पाकिस्तानी वॉशिंगटन के साथ अपने रिश्ते को नए सिरे से बनाने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले सप्ताह पाकिस्तान सरकार ने एक विशेष दूत तारिक फतेमी को वॉशिंगटन भेजा, जहां फतेमी ने यह संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
फतेमी ने उम्मीद जताई कि आने वाला प्रशासन पाकिस्तान को अमेरिका के साथ रिश्तों में अपनी विश्वसनीयता साबित करने के लिए नया मौका देगा।
पेंस ने भी उठाया कश्मीर में हस्तक्षेप का मामला
पाकिस्तान के पास यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि ट्रंप प्रशासन के साथ मजबूत रिश्ता भारत के साथ संबंधों में मध्यस्थता करने के लिए एक बयान से ज्यादा है। दरअसल, नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी कई मौकों पर इस ऑफर को दोहराया है। पेंस का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की योजना दोनों देशों के साथ मिलकर कश्मीर मुद्दे को सुलझाने में अहम भूमिका निभाने की है।
ट्रंप के विदेश मामलों में जानकारी और मुस्लिम विरोधी छवि को लेकर आधी अधूरी चिंताओं के बीच कुछ पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाइट हाउस में डीलमेकर का होना पाकिस्तान के लिए फायदे का सौदा हो सकता है।
दूसरी ओर भारत ने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी हस्तक्षेप के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। दोनों देश कश्मीर पर अपना दावा जताते रहे हैं, जहां हालिया समय में हिंसा और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। अक्टूबर महीने में नवाज शरीफ ने यूनाइटेड नेशंस में कश्मीर में हिंसा को लेकर भारत पर आरोप लगाए। दूसरी ओर उड़ी हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया।
पाकिस्तानी संसद में विदेश मामलों की कमेटी के चेयरमैन अवेश लेघारी ने कहा, 'अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता दोनों देशों के बीच विवाद को जन्म दे सकती है।' उन्होंने कहा कि सुपरपॉवर की मदद के बिना हम इसे हल नहीं कर सकते। यह एक फोन कॉल से ज्यादा की मांग करता है और बहुत ज्यादा कठिन परिश्रम की भी।