मैकडॉनल्ड अब वैसे चिकन का इस्तेमाल करेगी, जिन्हें कम एंटीबायोटिक देकर पाला गया होगा। दरअसल एंटीबायोटिक का इस्तेमाल चिकन को समय से पहले जल्द बड़ा करने के लिए किया जाता है, जो कि मनुष्य के शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।
Read Also: बर्गर में रेंगते मिले कीड़े, फेसबुक पर हो रही है इस मशहूर रेस्त्रां की थू थू
सुपरबग्स के कारण 2018 से दुनिया भर के चिकन उत्पादों में एंटीबायोटिक दवाओं का कम इस्तेमाल होना शुरू हो जाएगा। यह निर्णय ठीक उसी तरह लिया गया है जैसा कि वर्ष 2016 में अमेरिकी बाजार में लिया गया था। एंटी-बायोटिक दवाओं का इस्तेमाल मानव चिकित्सा के लिए भी किया जाता है।
यह एक ड्रग की तरह मनुष्यों को देने वाली दवाओं के रूप में होता है। क्योंकि जब भी आप चिकन खाते हैं तो एंटी-बायोटिक दवाओं की एक पूरी डोज आपके शरीर में चली जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण (एचपीसीए) एंटीमाइक्रोबेल्स है। कंपनी ने कहा है कि हम 2018 से दुनिया भर के बाजारों में बॉयलर चिकन की भी सप्लाई करेंगे। 2018 तक ब्राजील, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में सप्लाई होने वाले बॉयलर चिकन में एचपीसीए का सफाया हो जाएगा।
Read Also: दिल्ली में बंद हुए मैकडॉनल्ड के 55 में से 43 आउटलेट, दांव पर 1700 लोगों की नौकरी
केवल यूरोप के लिए एक एंटीबायोटिक कोलिस्टीन बनाया जाएगा।