मंगल पर उतरने के लिए इस यान के लिए शुरूआती सात मिनटों को बेहद अहम समझा जा रहा था। इस दौरान कैलिफोर्निया में बैठे नासा के वैज्ञानिक जबरदस्त तनाव में थे। इसका कारण था अंतरिक्ष यान को अपनी रफ्तार 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक कम करना। इस पर नियंत्रण बनाना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि मंगल के गुरुत्वाकर्षण बल का आकलन सटीक नहीं था।
खुलेंगे अरबों साल से अनसुलझे गूढ़ रहस्य
अपने अभियान के दौरान यह यान मंगल पर एक साइज्मोमीटर रखेगा जो इसके अंदर की हलचलें रिकॉर्ड कर सकेगा। इससे पता चलेगा कि मंगल के अंदर कोई भूकंप जैसी हलचल होती भी है या नहीं। यह पहला यान है जो मंगल की खुदाई करके उसकी रहस्यमय जानकारियां जुटाएगा। साथ ही एक जर्मन उपकरण भी मंगल की जमीन के पांच मीटर नीचे जाकर उसके तापमान का पता लगाएगा।
महत्वपूर्ण होगा तीसरा प्रयोग
इसके तीसरे प्रयोग में रेडियो ट्रांसमिशन का इस्तेमाल होगा जिससे यह पता चलेगा कि यह ग्रह अपनी धुरी पर डगमगाते हुए कैसे घूमता है। अभियान से जुड़ी वैज्ञानिक सुजैन स्म्रेकर के मुताबिक, ‘आप एक कच्चा और एक पका अंडा हाथ में लेकर उन्हें अलग-अलग घुमाएं। ये दोनों ही अंडे अलग-अलग तरल पदार्थों के कारण विभिन्न ढंग से घूमेंगे। और यह प्रयोग बताएगा कि मंगल के अंदर तरल चीज है या ठोस।