कुण्डली में सप्तमेश एवं सप्तम भाव का स्वामी त्रिक भाव
एवं मंगल से दृष्टि होने के कारण विवाह में विलंब है। वर्तमान में चल रहा दशाक्रम
भी आपके अनुकूल नहीं है।
ग्रह शांति के लिए प्रत्येक रविवार शिवलिंग पर दूर्वांकुर
चढ़ाएं। सवा सात रत्ती वजन का लाजवर्त उपरत्न चांदी में दाहिनी मध्यमा में शनिवार
के दिन धारण करें। ऐसा करने पर 32 वें वर्ष में आपके विवाह की संभावना
बनेगी।