वैज्ञानिकों ने भारतीय अंतरिक्ष यान चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से पहली बार चांद की मिट्टी की सबसे ऊपरी सतह में मौजूद पानी का नक्शा तैयार किया है।
इससे आने वाले समय में चंद्रमा पर मौजूद पानी और वहां के अध्ययन में काफी मदद मिल सकती है। इस अध्ययन को साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित किया गया है। साइंस जर्नल के अनुसार, इस अध्ययन का आधार वर्ष 2009 में चांद की मिट्टी में जल और संबंधित अणु हाइड्रॉक्सिल की शुरुआती खोज है।
अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने नासा के मून मिनरलॉजी मैपर के जरिए जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया। 2008 में यह मैपर चंद्रयान-1 के साथ रवाना हुआ था और इसका काम यह पता लगाना था कि वैश्विक स्तर पर कितना पानी मौजूद है।
विश्वविद्यालय के पूर्व पीएचडी छात्र शुआई ली ने कहा कि चांद की सतह पर लगभग हर जगह पानी की मौजूदगी के संकेत मिलते हैं। यह केवल ध्रुवीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है, जैसा कि पहले रिपोर्ट में बताया गया था।
पहली बार शनि ग्रह तक पहुंचेगा अंतरिक्ष यान
नासा का कासिनी अंतरिक्ष यान शनि ग्रह के करीब पहुंचने वाला है। ऐसा पहली बार होगा जब कोई अंतरिक्ष यान शनि ग्रह के करीब पहुंचेगा। 20 सालों की एक ऐतिहासिक यात्रा के अंतिम चरण में कासिनी 1,13,000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से इस ग्रह की ओर बढ़ रहा है।
15 सितंबर को यह शनि की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। यह यान शनि ग्रह के उपग्रहों में विशेषकर एनसेलाडस की सतह पर मौजूद हाइड्रोथर्मल गतिविधियों के बारे में बताएगा जो अब तक वैज्ञानिकों की नजरों से दूर है।