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फेसबुक के निवेशक चाहते हैं मार्क जुकरबर्ग इस्तीफा दें : रिपोर्ट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 17 Nov 2018 03:54 PM IST
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मार्क जुकरबर्ग - फोटो : PTI

फेसबुक के निवेशक चेयरमैन और सीईओ मार्क जुकरबर्ग पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं। ऐसा तब से किया जा रहा है कि जब से न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सोशल मीडिया साइट ने एक पीआर फर्म को नियुक्त किया है। डिफायनर्स पब्लिक अफेयर्स नाम की यह पीआर फर्म रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ी हुई है। इस फर्म के साथ गूगल और एपल के खिलाफ लेख लिखने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया गया है।

शनिवार को गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रिलियम एसेट मैनेजमेंट के सीनियर वाइस प्रेजिटेंट जोनस क्रोन जिनकी फेसबुक में एक बड़ी हिस्सेदारी है का कहना है कि जुकरबर्ग चेयरमैन का पद छोड़ दें।



क्रोन का कहना है कि "फेसबुक एक कंपनी है और कंपनी को जरूरत होती है कि उसका सीईओ और चेयरमैन अलग अलग हों।" लेकिन पीआर फर्म की खबर को जुकरबर्ग एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि लेख को पढ़ने के बाद मैंने फोन पर अपनी टीम के साथ बात की और हम इस फर्म के साथ काम नहीं कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक के एक अन्य निवेशक नताशा लैंब का कहना है कि चेयरमैन और सीईओ की संयुक्त भूमिका का मतलब है कि फेसबुक कंपनी के अंदर की समस्याओं को ठीक करने से बच सकता है। बता दें न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि फेसबुक इस फर्म के साथ अभी भी काम कर रहा है। बीते 3 सालों से जिन भी विवादों के साथ फेसबुक का नाम जुड़ा है, उनका असर कम हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पीआर फर्म ने एपल और गूगल के खिलाफ कई लेख लिखे हैं।  

फर्म के जरिए फेसबुक इस बात के प्रचार में भी सफल रहा है कि एंटी फेसबुक मूवमेंट चलाने के पीछे निवेशक और सामाजिक कार्यकर्ता जॉर्ज सोरोस का हाथ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्म ने पत्रकारों पर यह लिखने का भी दबाव डाला कि सोरोस उन समूहों के साथ आर्थिक संपर्क में है, जो फेसबुक का विरोध करते हैं।

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपने कर्मियों से कहा है कि वह आईफोन के बजाय एंड्रॉयड फोन का ही इस्तेमाल करें। इसके पीछे कारण ये है कि एपल के सीईओ टिम कुक प्राइवेसी के मामले में फेसबुक की आलोचना कर चुके हैं।

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मार्क जुकरबर्ग - फोटो : PTI
फेसबुक के निवेशक चेयरमैन और सीईओ मार्क जुकरबर्ग पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं। ऐसा तब से किया जा रहा है कि जब से न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सोशल मीडिया साइट ने एक पीआर फर्म को नियुक्त किया है। डिफायनर्स पब्लिक अफेयर्स नाम की यह पीआर फर्म रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ी हुई है। इस फर्म के साथ गूगल और एपल के खिलाफ लेख लिखने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया गया है।

शनिवार को गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रिलियम एसेट मैनेजमेंट के सीनियर वाइस प्रेजिटेंट जोनस क्रोन जिनकी फेसबुक में एक बड़ी हिस्सेदारी है का कहना है कि जुकरबर्ग चेयरमैन का पद छोड़ दें।

क्रोन का कहना है कि "फेसबुक एक कंपनी है और कंपनी को जरूरत होती है कि उसका सीईओ और चेयरमैन अलग अलग हों।" लेकिन पीआर फर्म की खबर को जुकरबर्ग एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि लेख को पढ़ने के बाद मैंने फोन पर अपनी टीम के साथ बात की और हम इस फर्म के साथ काम नहीं कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक के एक अन्य निवेशक नताशा लैंब का कहना है कि चेयरमैन और सीईओ की संयुक्त भूमिका का मतलब है कि फेसबुक कंपनी के अंदर की समस्याओं को ठीक करने से बच सकता है। बता दें न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि फेसबुक इस फर्म के साथ अभी भी काम कर रहा है। बीते 3 सालों से जिन भी विवादों के साथ फेसबुक का नाम जुड़ा है, उनका असर कम हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पीआर फर्म ने एपल और गूगल के खिलाफ कई लेख लिखे हैं।  

फर्म के जरिए फेसबुक इस बात के प्रचार में भी सफल रहा है कि एंटी फेसबुक मूवमेंट चलाने के पीछे निवेशक और सामाजिक कार्यकर्ता जॉर्ज सोरोस का हाथ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्म ने पत्रकारों पर यह लिखने का भी दबाव डाला कि सोरोस उन समूहों के साथ आर्थिक संपर्क में है, जो फेसबुक का विरोध करते हैं।

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपने कर्मियों से कहा है कि वह आईफोन के बजाय एंड्रॉयड फोन का ही इस्तेमाल करें। इसके पीछे कारण ये है कि एपल के सीईओ टिम कुक प्राइवेसी के मामले में फेसबुक की आलोचना कर चुके हैं।

फेसबुक के चेयरमैन और सीईओ अलग होने चाहिए: निवेशक

गार्जियन अखबार के मुताबिक जोनस का कहना है कि 'फेसबुक एक कंपनी है और इसके चेयरमैन और सीईओ अलग-अलग होने चाहिए। हालांकि, डिफायनर्स विवाद पर जकरबर्ग का कहना है कि उन्हें इसके साथ कंपनी के काम की जानकारी नहीं थी। उन्होंने गुरुवार को कहा कि फेसबुक ने अब डिफायनर्स से कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है।

इसलिए मार्क को हटाना चाहते हैं शेयर होल्डर्स

इस बारे में स्टॉक स्ट्रिंजर ने एक बयान जारी कर जकरबर्ग को चेयरमैन पद से हटाने के कारण भी बताए थे। उन्होंने बताया था कि स्वतंत्र चेयरमैन नहीं होने से 2016 के अमेरिकी चुनावों में रूसी दखल बढ़ा और फेसबुक ने इस पर सही तरीके से काम नहीं किया।

कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा चुराकर उसका गलत इस्तेमाल किया, लेकिन फेसबुक ने इस पर भी सही तरीके से काम नहीं किया। उन्होंने ये भी कहा था कि फेसबुक ने स्मार्टफोन कंपनियों से यूजर्स का डेटा शेयर किया। साथ ही फेक न्यूज रोकने में भी नाकाम रहा।

पिछले साल भी लाया गया था हटाने का प्रस्ताव

साल 2017 में भी मार्क जकरबर्ग को फेसबुक के बोर्ड मेंबर्स से हटाने का प्रस्ताव लाया गया था। उस वक्त 51% वोट इस प्रस्ताव के समर्थन में पड़े थे, लेकिन मार्क जकरबर्ग के पास मेजोरिटी शेयर थे, जिस वजह से ये प्रस्ताव गिर गया था।

दरअसल, फेसबुक में डुअल क्लास शेयर स्ट्रक्चर काम करता है, जिसमें क्लास-ए और क्लास-बी के शेयर होते हैं। इनमें से क्लास-बी शेयर होल्डर्स के पास क्लास-ए शेयरहोल्डर्स के मुकाबले 10 गुना ज्यादा वोटिंग पावर होती है।

मार्क जकरबर्ग के पास सबसे ज्यादा क्लास-बी के शेयर्स हैं और इसी वजह से पिछले साल लाया गया प्रस्ताव गिर गया था। लिहाजा अगले साल आने वाला प्रस्ताव भी गिर सकता है।
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