संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशन में भारतीय राजदूत इनम गंभीर ने पाकिस्तान के पेशावर में एक स्कूल पर 2014 में हुए आतंकी हमले में भारत का हाथ होने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र में जवाब के अधिकार (राइट टू रिप्लाई) का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भारत पर निराधार आरोप लगाकर हमले में मारे गए बच्चों का अपमान कर रहे हैं। कुरैशी ने अपने संबोधन में कहा था कि हमले में शामिल आतंकियों को भारत का समर्थन था।
इनम ने कहा, भारत प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार को याद दिलाना चाहता है कि 2014 में पेशावर के स्कूल पर हमले से हमारे देश में हर कोई दुखी था। भारत ने हमले की निंदा की थी। संसद के दोनों सदनों ने दुख जताते हुए मौन रखा था। भारत के सभी स्कूलों में बच्चों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया था।
भारतीय राजदूत ने कहा कि कुरैशी का आरोप आतंक के दानव से मुंह मोड़ने की कोशिश है। पाकिस्तान आतंकवाद के जरिये पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैलाने और उनके इलाकों पर कब्जा करने की कोशिशें करता रहता है। कुरैशी के अपने संबोधन में ‘नए पाकिस्तान’ पर जोर दिया था।
इस पर चुटकी लेते हुए गंभीर ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल पाक के नए विदेश मंत्री के नए पाकिस्तान पर विचारों को सुनने आया था, लेकिन यह देश नहीं बदला। कुरैशी के कश्मीर मुद्दा उठाने पर इनम ने कहा, भारत पाकिस्तान की नई सरकार को स्पष्ट तौर पर बता चुका है कि पूरा जम्मू-कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
22 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को पाकिस्तान का संरक्षण
गंभीर ने आतंक के खिलाफ पाकिस्तान की मुहिम के दावे की धज्जियां उड़ाते हुए कहा, क्या पाक इनकार कर सकता है कि उसने संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित 132 आतंकियों को पनाह दे रखी है। पाक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंधित 22 आतंकी संगठनों को संरक्षण दे रहा है। क्या वह इनकार कर सकता है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से एक करोड़ डॉलर का इनामी आतंकी हाफिज सईद पाकिस्तान में आजादी घूम रहा है।
पहले अपने घर में मानवाधिकार की चिंता करे पाकिस्तान
मानवाधिकार हनन पर जवाब देते हुए गंभीर ने कहा कि प्रिंसटन में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर आतिफ मियां को पाकिस्तान की आर्थिक सलाहकार परिषद में नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय ‘अहमदिया’ से होने के कारण हटा दिया गया। पाकिस्तान को पहले अपने घर में मानवाधिकार की चिंता करनी चाहिए। कुरैशी ने कश्मीर में मानवाधिकार पर जारी संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की जिस रिपोर्ट की तारीफ की है, उसका यूएन के किसी सदस्य देश ने समर्थन नहीं किया है।
कुरैशी ने कहा था...
पाकिस्तान पेशावर के स्कूल पर हुए हमले को कभी नहीं भूलेगा, जिसमें 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। इस हमले समेत पाकिस्तान में हुए कई आतंकी हमलों में शामिल आतंकियों को भारत का समर्थन हासिल था।