अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत को बेशक भारत के हित और पाक के खिलाफ माना जा रहा है, लेकिन एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिका और भारत के रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है। दक्षिण एशियाई मामले की अमेरिकी विशेषज्ञ लिसा कुर्टिस का कहना है कि ट्रंप प्रशासन भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत बनाएगा और पाकिस्तान के दोहरे रवैये के खिलाफ कम नरमी बरतेगा। हालांकि एच-1बी वीजा को लेकर भारत और अमेरिका के बीच अनबन हो सकती है।
शीर्ष अमेरिकी थिंक-टैंक ‘द हेरिटेज फाउंडेशन’ की लिसा कुर्टिस ने कहा कि पिछले दो सालों में भारत और अमेरिका के रिश्तों में काफी प्रगति हुई है, जिसको ट्रंप प्रशासन आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के दोनों दलों का यह मानना है कि एशिया प्रशांत में अमेरिका के उद्देश्यों को हासिल करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है। इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था बनाए रखने के अलावा समुद्र के रास्ते मुक्त और बेरोेकटोक आवाजाही सुनिश्चित करना अमेरिका के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
द हेरिटेज में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं क्षेत्रीय राजनीतिक मामले की विशेषज्ञ लिसा ने कहा कि अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान भारत के संबंध में कई सकारात्मक बयान दिए हैं, जिससे जाहिर होता है कि वह भारत के साथ अमेरिकी भागीदारी को मजबूत करने के समर्थक हैं। वह आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के साथ ही पाकिस्तान के प्रति कम नरमी रखेंगे, जिसका भारत हमेशा से समर्थन करता आ रहा है। ट्रंप प्रशासन एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करेगा। हालांकि एच-1बी वीजा को लेकर दोनों के बीच मनमुटाव हो सकता है।