रिपोर्ट के अनुसार चीन और भारत में संयुक्त रूप से घर के बाहर और भीतर का वायु प्रदूषण अधिक है। भारत की 43 फीसदी और चीन की 30 फीसदी जनसंख्या ठोस ईंधन का प्रयोग करती है। वहीं 2016 के आंकड़ों के मुताबिक यह स्तर और भी बढ़ गया जिसमें भारत के 5,600 लाख लोग और चीन के 4,160 लाख लोग ठोस ईंधर का प्रयोग कर रहे थे।
हालांकि रिपोर्ट में ये बात भी स्वीकार की गई है कि भारत सरकार ने हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम करना शुरु कर दिया है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को इसके लिए और भी ठोस कदम उठाने होंगे। सरकार को घरों में भारी संख्या में इस्तेमाल होने वाले बायोमास उत्सर्जन, कोयला जलाना और धूल प्रदूषण को कम करना होगा। व्यापक तौर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 7 अरब लोग यानि दुनिया की 95 फीसदी जनसंख्या ऐसे इलाकों में रह रही है जहां की हवा अस्वास्थ्यकर है।