मानव तस्करी का एक और विभत्स चेहरा सामने आया है। मेक्सिको की रहने वाली 23 वर्षीय एक लड़की ने दावा किया है कि उसके साथ चार साल के भीतर करीब 43,200 लोगों ने बलात्कार किया है।
इस युवती का नाम कार्ला जकिंटो है जिसने सीएनएन से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया। कार्ला के मुताबिक जब वह 12 साल की थी उसी वक्त एक मानव तस्कर ने उसका अपहरण कर लिया था। उसने बताया, 'तस्कर ने पहले उसे कुछ उपहार देकर उसके दोस्ती की और बाद में उसको गुमराह करके मेक्सिको के टेनानसिंगो शहर ले गया और मुझे वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया।'
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उसके बाद उसे मेक्सिको के सबसे बड़े शहरों में से एक गुआडलजारा ले जाया गया और उससे जबरदस्ती वेश्यावृत्ति कराया जाने लगा। कार्ला के मुताबिक रोजाना करीब 30 लोग उसको अपने हवस का शिकार बनाते थे। यह प्रक्रिया हफ्ते के सातों दिन चलता था। बीते चार सालों में करीब 43,200 लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया।
बचाने आए पुलिस वाले ने बनाया वीडियो
कार्ला के मुताबिक वह एक बिखरे हुए परिवार का हिस्सा थी जिसकी मां ने भी उसे छोड़ दिया था। महज पांच साल की छोटी उम्र में ही वह यौन हिंसा का शिकार हुई थी। उसने बताया कि वेश्यावृत्ति के पेशे में धकेले जाने के बाद उसे रोजाना उसकी मर्जी के खिलाफ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाने लगा।
जकिंटो के मुताबिक, 'मेरा काम सुबह 10 बजे से शुरू होता था और देर रात तक चलता था। मैं रोती थी इसलिए कई आदमी मुझ पर हंसते थे। वो मेरे साथ क्या करते थे इसको देखने की हिम्मत मुझमें नहीं थी इसलिए मैं अपनी आंखे बंद कर लेती थी जिससे की मुझे कुछ महसूस न हो।'
उसने बताया कि उसको सबसे ज्यादा बुरा उस वक्त महसूस हुआ जब एक होटल में उसे और उसके साथ की अन्य लड़कियों को बचाने के लिए पुलिस ने छापेमारी की। उस वक्त हमें लगा कि पुलिस वाले हम बचाने आए हैं लेकिन बजाय उसके उनमें से एक अधिकारी ने हमारी उसी अवस्था में वीडियो बनानी शुरू कर दी।
एक बार फिर उसका अपहरण करने वाले युवक के बारे में जिक्र करते हुए कार्ला ने कहा, 'वे मुझे लोहे की चैन से मारते थे। इतना ही नहीं वे मुझे मुक्के और लात से भी मारते थे। मेरा बाल नोंचते थे और यहां तक की वे मेरे मुंह पर थूकते भी थे। उन लोगों ने मुझे गर्म लोहे की सलाखों से भी दागा। वे मुझ पर आरोप लगाते थे कि मैं किसी ग्राहक से प्रेम करती हूं। वे मुझे वेश्या बुलाते थे।'
कार्ला ने वेश्यावृत्ति के पेशे में धकेले जाने के बाद उसके साथ हुए अमानवीय दुर्व्यवहारों और प्रताड़नाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उसे वेश्यालयों, होटलों, बदनाम सड़कों के किनारे और यहां तक की लोगों के घर भी भेजा जाता था। इसके लिए कोई छुट्टी भी नहीं मिलती थी जिससे की हम बाहर की दुनिया का भी आनंद ले सकें।