कम मेहनत के साथ वज़न घटाना कौन नहीं चाहता, पर खाना खाने से वज़न घट जाए तो क्या बात है। दरअसल कुछ किस्मों का भोजन ‘नेगेटिव कैलोरी फूड’ कहलाता है।
जैसा नाम वैसा मतलब। ये ऐसा भोजन है जिससे शरीर में जितनी कैलोरी बढ़ती है उससे कहीं ज़्यादा भोजन पचाने में खर्च हो जाती है।
यानि पूरी प्रक्रिया में शरीर में कैलोरी घटती है। उदाहरण के तौर पर अजवाइन का पौधा जिसमें पानी और फाइबर की मात्रा बहुत ज़्यादा है।
या फिर ठंडा पानी जिसे हज़म करने के लिए शरीर उसे 37 डिग्री तक गरम करता है।
इसके अलावा कुछ ऐसे भोजन भी होते हैं जो ‘मेटाबौलिक रेट’ यानि पचाने की गति को तेज़ करते हैं।
कई डायट ड्रिंक्स कैफीन, गुआनिन, टौरीन और ग्रीन टी के तत्व इस्तेमाल करते हैं जिनमें ये शक्ति होती है।
‘नेगेटिव कैलोरी फूड’
पर क्या ये सचमुच ‘नेगेटिव कैलोरी फूड’ हैं? न्यूट्रिशनिस्ट्स की राय कुछ मिली-जुली है।
ओहायो के माउंट यूनियन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉन मेन्डेल कहते हैं कि ये कोई जादू की छड़ी नहीं है और इसका असर देखने के लिए लंबे समय तक किसी एक भोजन का सेवन करना होगा।
मेन्डेल कहते हैं, 'कुछ कैलोरी कम हो भी जाए तो मौटे तौर पर शोध बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि दिन में सैंकड़ों कैलोरी घट जाए, पूरे साल में करीब साढ़े चार किलो ज़रूर घट सकता है।'
वहीं ऐलाबामा विश्वविद्यालय में न्यूट्रिशन साइंसिस विभाग के प्रमुख टिम ग्रेवी के मुताबिक तो नहीं, 'सैद्धान्तिक रूप से तो ये मुमकिन है, लेकिन असलियत में ऐसे भोजन नहीं होते।'
उनके मुताबिक चबाने और पचाने में शरीर की मेहनत को लगती है लेकिन बहुत ज़्यादा कैलोरी नहीं खर्च होती जितना अंदाज़ा लगाया जा रहा है।
डॉ। ग्रेवी कहते हैं, 'अजवाइन के पौधे से फायदा तो होता है, ये पेट भरने का अहसास देते हैं लेकिन ये पहले से जमा हुई कैलोरी खत्म नहीं करते, और सिर्फ ऐसे भोजन पर इंसान जी भी तो नहीं सकता।'
उनका मानना है कि वज़न घटाने का सबसे कारगर तरीका तो वही पुराना है, कम कैलोरी खाना और व्यायाम के ज़रिए उन्हें पचाना।