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अमेरिका में तेजी से बढ़ रहा भारतीय भाषाओं का चलन, हिंदी सबसे आगे

Fri, 21 Sep 2018 09:36 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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हिंदी
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भारत की राजभाषा हिंदी की एक बार फिर से विश्व में अपनी साख बनाई है। वह अमेरिका में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भारतीय भाषा बन गई है। इसके बाद गुजराती और तेलुगू का नंबर आता है। हालांकि यदि 2010 के आंकड़ों से 2017 की तुलना करें तो तेलुगू भाषी व्यक्तियों की संख्या में 86 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

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यूएस सेंसस ब्यूरो द्वारा 2017 द्वारा अमेरिकी समुदाय सर्वे (एसीएस) के डाटा को हाल में जारी किया गया है। इसमें 1 जुलाई 2017 तक अमेरिका की जनसंख्या को मापा गया है। इससे पता चलता है कि अमेरिका में 21.8 प्रतिशत नागरिकों की उम्र पांच साल से ज्यादा है। इसमें मूल निवासी, वैध, अवैध, आप्रवासी भी शामिल हैं। यह सभी घर में अंग्रेजी के अलावा कोई और भाषा बोली जाती है। 30.5 करोड़ की कुल जनसंख्या में से 6.7 करोड़ घर में विदेशी भाषा बोलते हैं।

2016 के आंकड़ों के अनुसार 30.3 करोड़ की कुल जनसंख्या में से 6.5 करोड़ लोग घरों में विदेशी भाषा बोलते थे। अमेरिका में 8.63 लाख लोग हिंदी बोलते हैं। इसके बाद 4.34 लाख लोग गुजराती और 4.15 लाख लोग तेलुगू भाषी हैं। इमिग्रेशन स्टडीज सेंटर (सीआईएस) जिसे कि अप्रवासियों के थिंकटैंक के तौर पर देखा जाता है उसने डाटा का विश्लेषण किया। खासतौर से 2017 से 2010 के आंकड़ों की तुलना की गई। उसकी रिपोर्ट के अनुसार सात सालों के अंदर तेलुगू भाषी लोगों की संख्या में 86 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं हिंदी और गुजराती में यह इजाफा 42 और 22 प्रतिशत का है।
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सीआईएस की रिपोर्ट के अनुसार विदेशी भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 1980 की तुलना में 1990 में दोगुनी और अब तिगुनी हो गई है। अमेरिका के पांच बड़े शहरों में रहने वाले लोग घरों में अंग्रेजी के अलावा विदेशी भाषा बोलते हैं। उदाहरण के लिए लॉस एंजिलिस में 59 प्रतिशत, न्यूयॉर्क में और ह्यूस्टन में 49 प्रतिशत है। एसीएस अमेरिकी सरकार द्वारा हर साल कराए जाने वाला सबसे बड़ा सर्व है। इसमें 20 लाख से ज्यादा घरों को शामिल किया जाता है।

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