अब तक के बने मशीनी रोबो निर्देश पाने पर ही काम किया करते थे। कई बार तो वे उन बातों को अनसुनी कर देते हैं, जिनके बारे में उनके भीतर कोई प्रोग्रामिंग नहीं की गई है। अब ऐसे में रोबो के कुछ कामों को छोड़ दिया जाए तो आम आदमी से इनका वास्ता नहीं के बराबर ही रहता था।
मगर, अब वैज्ञानिक एक ऐसा ‘फेबुलान’ रोबो विकसित करने में जुटे हैं, जो परिस्थितियों के मुताबिक खुद-ब-खुद फैसले ले लिया करेगा। यह रोबो नैतिक रूप से काफी समझदार होगा। टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में मानव रोबो संवाद प्रयोगशाला के वैज्ञानिक मैथ्यिाज शुत्ज कहते हैं, ‘इससे रोबो को नैतिक आधार मिलेगा कि वह किसी भी हालातों में क्या कदम उठाए।’
इस तरह के रोबो के विकास में कंप्यूटर वैज्ञानिकों के अलावा दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, भाषाविज्ञानी, वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी सलाहें ली जा रही हैं। वैज्ञानिक यह भी चाहते हैं कि यह रोबो सही या गलत के बारे में खुद ही फैसला लेने में सक्षम हैं।