मई-2017 से भारत समेत दुनिया भर के सरकारी दफ्तरों का कामकाज प्रभावित करके अरबों डॉलर की वसूली करने वाले खतरनाक साइबर हैकरों के मंसूबों का खुलासा अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई और गृह सुरक्षा मंत्रालय ने किया है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के हाथ लगी खुलासे की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि हैकर्स अब ऐसे परमाणु केंद्रों के कंप्यूटर नेटवर्क में सेंध लगा रहे हैं जो परमाणु ऊर्जा केंद्र और अन्य प्रकार की ऊर्जा सेवाओं का संचालन करते हैं। इनमें अमेरिका समेत कुछ देशों के विनिर्माण संयंत्र भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक हैकरों के निशाने पर ‘वुल्फ क्रीक परमाणु संचालन निगम’ भी रह चुका है जो अमेरिका में परमाणु ऊर्जा संयंत्र चलाता है। इसके नेटवर्क में कोई सेंध लगने पर अमेरिका समेत दुनिया के कई देश प्रभावित हो सकते थे। यद्यपि रिपोर्ट में ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि साइबर हमलावर इस हैकिंग से परमाणु संबंधी जासूसी करना चाह रहे थे या प्लांट के किसी हिस्से को तबाह करना चाहते थे। इस बारे में निगम ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया लेकिन एफबीआई और गृहमंत्रालय ने संयुक्त बयान में कहा कि फिलहाल हैकरों से सार्वजनिक सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है।
इस खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हैकरों का इरादा भविष्य में किए जाने वाले साइबर हमलों के लिए कंप्यूटर नेटवर्क की मैपिंग से जुड़ा मालूम पड़ता है। लेकिन जांचकर्ता भी हैकरों की कोड से जुड़ी विध्वंसक ताकत का विश्लेषण नहीं कर पा रहै हैं। आशंका है कि यह काफी खतरनाक हो सकता है। संयुक्त जांच से जुड़े दो जांचकर्ताओं ने बताया कि फिलहाल यह जांच शुरूआती दौर में है लेकिन हैकरों ने ऊर्जा क्षेत्र में हैकिंग के लिए जो तकनीकी अपनाई है वह रूसी हैकिंग ग्रुप ‘एनर्जिक बीयर’ से मिलती-जुलती है, जो साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कंपनी है।
जॉब के लिए फर्जी रिज्यूमे से हमले का अंदेशा
सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि हैकरों ने कंट्रोल इंजीनियरिंग के लिए अपने फर्जी रिज्यूमे बनाए और उन्हें जॉब के लिए वरिष्ठ औद्योगिक कंट्रोल इंजीनियरों के पास भेज दिया। इस तरह हैकरों की पहुंच महत्वपूर्ण नियंत्रण प्रणाली तक हो गई। ये फर्जी रिज्यूमे एमएस वर्ड्स डाक्यूमेंट में दुर्भावनापूर्ण कोड के साथ लाखों की संख्या में थे। इन पर क्लिक करते ही हमलावरों ने मशीन की सारी जानकारी चुरा ली।
लगातार बढ़ रहा है एडवांस तकनीकी का खतरा
फिलहाल हैकरों की पहचान नहीं हो पाई है लेकिन इस संयुक्त रिपोर्ट में इस बात के स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि एडवांस तकनीकी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश मामलों में यह हमले लोगों को निशाना बनाकर किए गए हैं। ऐसे औद्योगिक नियंत्रक इंजीनियर्स जिनका सिस्टम के साथ प्रत्यक्ष एक्सेस है उसमें न सिर्फ आग लग सकती है बल्कि विस्फोट तक हो सकता है।