विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कह चुकी हैं कि एच-1 बी वीजा नियमों में होने जा रहे बदलाव को लेकर हम छह सितंबर को नई दिल्ली में होने जा रही टू प्लस टू वार्ता के दौरान पूरी विनम्रता से उठाएंगे। इस पर अमेरिका को आशंका हुई कि कहीं यह वार्ता मूल मुद्दों से भटककर एच-1 बी वीजा पर केंद्रित न हो जाए। इसे मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता के रूप में लिया जा रहा है।
सख्त वीजा नियमों की थी कवायद
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा आव्रजन नीति में बदलाव की घोषणा के तहत वीजा नियम सख्त करते हुए अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कामगारों के लिए वीजा सिफारिशों पर नियंत्रण लगाने की कवायद थी। ऐसा करने से विदेशियों की नौकरी के रास्ते कम हो जाते। इसके अलावा एच-4 वीजा नीति को खत्म करने की कवायद भी है जिसमें एच-1 बी वीजाधारकों के जीवनसाथी को अमेरिका में नौकरी के दरवाजे बंद होने थे।