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बच्चों में भी अमीर और गरीब की खाई

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बच्चों के लिए काम करने वाली एक संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' का कहना है कि अमीर और गरीब के बीच फासला इस वक्त पिछले बीस सालों में सबसे ज्यादा है और लगातार बढ़ रहा है। ये फासला खासकर बच्चों में भी दिखाई दे रहा है और इससे उनके स्वास्थ्य और परवरिश पर असर हो रहा है।
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संस्था की रिपोर्ट मानती है कि बाल मुत्युदर को कम करने जैसे मुद्दों पर प्रगति हुई लेकिन आमदनी के लिहाज से इसमें भी बहुत सी असमानताएं पाई जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जीवन स्तर को बेहतर करने की कोशिशों में इस असमानता से बाधाएं आ सकती हैं।

असमानता की चुनौती
ये रिपोर्ट गरीबी पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय समिति की बैठक से एक दिन पहले जारी की गई है। सेव द चिल्ड्रन के मुख्य कार्यकारी जस्टिन फॉर्सिथ ने कहा, “हाल के दशकों में बच्चों की मौतों को कम करने और बच्चों के लिए अवसर बढ़ाने के मामले में बहुत प्रगति हुई है। अब हम ऐसी स्थिति में पहुंच रहे हैं जहां हमारे जीवनकाल में ही रोकी जा सकने वाली मौतों को खत्म किया जा सकता है।”
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लेकिन बढ़ती असमानता एक बड़ी चुनौती है। फॉर्सिथ बताते हैं, “जब तक असमानता पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक भावी विकास का कोई भी ढांचा इस प्रगति को तेज करने में सफल नहीं होगा।” सेव द चिल्ड्रन के शोधकर्ताओं ने पाया कि 32 विकासशील देशों में ज्यादातर देशों में 1990 के दशक से राष्ट्रीय आय में अमीर लोगों की हि्स्सेदारी में वृद्धि हुई है। इसमें से बीस प्रतिशत देशों में इस अवधि में गरीबों की आय में गिरावट आई है।
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