अमेरिकी शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक की मदद से ढेरों नकली सेलेब्रिटी चेहरे तैयार किए हैं। यानी देखने में तो ये चेहरे किसी सेलेब्रिटी जैसे खूबसूरत और आकर्षक हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा कोई शख्स नहीं है। इन नकली चेहरों का इस्तेमाल कंप्यूटर जेनरेटेड इमेजरी टीवी और फिल्मों में किया जा सकता है। इससे फिल्मों का बजट कम हो जाएगा। यह असाधारण प्रोग्राम अमेरिकी तकनीकी कंपनी एनवीडिया ने तैयार किया है।
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एनवीडिया के मुताबिक ये सभी नकली चेहरे तस्वीरों में बेहद असली लगते हैं। विज्ञापन और वीडियो गेम उद्योग में भी इस तकनीक का जबरदस्त इस्तेमाल हो सकता है। एनवीडिया के मुख्य शोधकर्ता जैकू लेटिनेन ने कहा, हम सब जानते हैं कि किसी व्यक्ति की तस्वीर कैसी लगती है। पर कुछ लोगों के पास ही काल्पनिक व्यक्ति की तस्वीर बनाने का कौशल होता है। यह प्रोग्राम काल्पनिक चेहरे बनाने का यही काम आसानी से कर देता है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रोग्राम की मदद से प्रोसोपैगनोसिया का भी इलाज हो सकता है। इस बीमारी में व्यक्ति दो चेहरों के बीच अंतर नहीं कर पाता है।
तीस हजार सेलेब्रिटी के चेहरे का इस्तेमाल
इस कंप्यूटर प्रोगाम को बनाने के लिए तीस हजार सेलेब्रिटी के चेहरे के डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया। यह प्रोग्राम उत्पादक विरोधात्मक नेटवर्क से बना है, जिसमें दो प्रतिस्पर्धी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मौजूद है। पहली एआई बेतरतीब ढंग से चेहरे बनाती है और दूसरी इसमें से असली और नकली चेहरे चुनती है, जब यह सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, पहली एआई काम करना बंद कर देती है। यह प्रोग्राम सिर्फ चेहरे नहीं बल्कि परिदृश्य और वस्तुएं भी बनाता है।