धूल भरी आंधी का प्रभाव सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं बल्कि मंगल ग्रह की सतह के एक चौथाई हिस्से में भी धूल भरे तूफान की विशाल चादर बिछ गई है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस धूल भरे तूफान को ‘अंधकार और शाश्वत रात्रि’ के रूप में वर्णित किया है। इस विशाल तूफान से नासा के सौर ऊर्जा से चलने वाले अपॉर्चुनिटी रोवर को भी खतरा पैदा हो गया है।
नासा के अधिकारियों ने कहा कि मंगल पर इस धूल भरे तूफान के चलते यहां प्राथमिक ऊर्जा स्रोत के रूप में सूर्य का प्रकाश पूरी तरह खत्म हो गया है। नासा का रोवर मंगल की अभेद्य घाटी में है, जहां ऐसा प्रतीत होता है कि यह स्वचालित मोड से बिजली-बचत मोड में प्रवेश कर रहा है। यह रोवर मंगल पर इस हालत में तब तक रहेगा जब तक सूर्य की रोशनी ग्रह पर दोबारा न हो जाए।
नासा के अपॉर्चुनिटी प्रोजेक्ट मैनेजर जॉन कैल्लेस ने कहा, ‘हम मानवरहित यान के अस्तित्व को लेकर चिंतित हैं, लेकिन उम्मीद है कि तूफान छंटने पर हम रोवर के साथ दोबारा संवाद स्थापित कर सकेंगे।’
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि मंगल पर करीब 1.4 करोड़ वर्ग मील (3.5 करोड़ वर्ग किलोमीटर) में फैले इलाके में धूल के गुबार की परत के चलते यहां के हालातों पर शोध किया जा रहा है। फिलहाल इस तूफान के खत्म होने का इंतजार है।
30 मई के बाद लगातार भीषणतम होता गया तूफान
नासा अधिकारी जॉन कैल्लेस ने बताया कि मंगल ग्रह पर तूफान के बारे में हमें सबसे पहले 30 मई को पता चला था। लेकिन इसके बाद यह तूफान लगातार बढ़ता गया और इसकी मोटी चादर भीषणतम स्थिति में पहुंच गई। इस रोबोटिक यान से नासा का आखिरी बार 10 जून को संपर्क हुआ था। फिलहाल यह लाल ग्रह घुप्प अंधकार में डूबा हुआ है।