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ट्रंप के समर्थन में उतरे हिंदू, मुस्लिम और सिख

Tue, 08 Mar 2016 03:08 PM IST
बीबीसी/अमेरिका
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डॉनल्ड ट्रंप को कई हिंदू संगठनों का साथ मिल रहा - फोटो : Reuters
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रिपब्लिकन रेस में सबसे आगे चल रहे डॉनल्ड ट्रंप एक मुसलमान विरोधी और सिर्फ गोरे लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवार की तरह नजर आए हैं, लेकिन अब कुछ हिंदू, मुसलमान और सिख उनके समर्थन में आकर इस छवि को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। एक हिंदू संगठन ने तो जोश में आकर ट्रंप को देवी-देवताओं के करीब ला खड़ा किया है। हिंदूज फॉर ट्रंप (Hindus For Trump) के नाम से अपना फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल चला रहे इस गुट ने ट्रंप को ब्रम्हा या विष्णु की तरह दिखाने की कोशिश की है। ट्रंप को योग की मुद्रा में कमल के फूल पर बैठा दिखाया है जिस पर “ओम” का निशान बना हुआ है। 
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उनके फेसबुक पन्ने पर ट्रंप से “नफरत करनेवालों” के लिए एक पैगाम भी है जिसमें कहा गया है: “ट्रंप अमरीका को फिर से महान बनाने का वादा कर रहे हैं।" इसका मतलब है और नौकरियां, युद्ध की कम बातें, मजबूत अर्थव्यवस्था, सुरक्षित सीमाएं और कानूनी रूप से यहां आए लोगों के लिए बेहतर ज‌िंदगी। वो जीतने जा रहे हैं और आप इतिहास के गलत पक्ष के साथ खड़े हैं।” अमेरिका में हिंदुओं के अधिकारों के लिए काम करनेवाली संस्था हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन का कहना है कि एक गैर-सरकारी संस्था होने के नाते वो किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करते। लेकिन ट्रंप को एक हिंदू देवता की तरह दिखाए जाने के खिलाफ उनके पास कई शिकायतें आई हैं। संस्था के एक प्रवक्ता जय कंसारा ने बीबीसी को बताया कि हमलोगों ने इस संगठन को उनके ट्विटर हैंडल पर अपनी चिंताओं से वाकिफ करवाया है लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला है।”



एक अंदाजा है कि अमेरिका में हिंदुओं की आबादी बीस से पच्चीस लाख तक है। न्यू जर्सी में रहनेवाले भारतीय मूल के कुछ अमेरिकी भी ट्रंप के समर्थन में आए हैं लेकिन वो उसे एक हिंदू गुट नहीं बल्कि भारतीय मूल के अमरीकी गुट की तरह पेश कर रहे हैं। “इंडियन अमेरिकन फॉर ट्रंप 2016” (Indian Americans For trump 2016) नामक इस गुट के एक सदस्य सुधीर पारिख का कहना है कि वो ट्रंप का समर्थन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनमें रिपबलिकंस और डेमौक्रैट्स दोनों ही के साथ काम करने की काबिलियत है। सुधीर पारिख एक कामयाब डॉक्टर हैं और पारिख वर्ल्ड मीडिया, जो कई छोटे-छोटे अखबार निकालता है, के मालिक भी हैं। कहते हैं, “अब ट्रंप को रोकना मुश्किल है। " हमारे समुदाय में से ज्यादातर लोग हिलेरी क्लिंटन का साथ दे रहे हैं और ऐसे में जरूरी है कि कोई दूसरे पक्ष के साथ भी खड़ा हो जिससे हमारे हितों की रक्षा हो सके और वाशिंगटन तक हमारी पहुंच बनी रहे।”
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भारतीय उपमहाद्वीप से यहां आकर बसे ज़्यादातर लोग डेमोक्रैट्स के साथ रहे हैं लेकिन अक्सर वो पार्टी से हटकर उम्मीदवार की तरफ झुके हैं। मिसाल के तौर पर जॉर्ज डब्ल्यू बुश भारतीयों के बीच काफ़ी लोकप्रिय थे क्योंकि उन्होंने भारत के साथ परमाणु समझौते की एक तरह से नींव रखी थी। सुधीर पारिख कहते हैं कि उनका गुट हिंदुओँ का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा लेकिन कई हिंदू संगठनों का उन्हें साथ मिल रहा है। तो वजह क्या है कि हिंदू ट्रंप का साथ दे रहे हैं? पारिख कहते हैं, “हो सकता है कि ट्रंप ने मुसलमानों के खिलाफ जो बयान दिया है वो उन्हें पसंद आया हो लेकिन वो एकमात्र कारण हो ऐसा नहीं है।” ट्रंप ने अपनी रैलियों में सभी मुसलमानों के अमरीका में घुसने पर तबतक रोक लगाए जाने की वकालत की है “जबतक ये पता नहीं चल जाए कि ये माजरा क्या है।"



इस बयान की दुनिया भर में आलोचना हुई है लेकिन ट्रंप के समर्थन में उतरे एक मुसलमान गुट ने कहा है कि उनके बयानों को मीडिया ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी साजिद तरार खुद को अमेरिकन मुस्लिम्स फॉर ट्रंप (American Muslims for Trump) कहनेवाले इस गुट के संस्थापक हैं। उनका कहना है कि ट्रंप सीरिया जैसे देशों से अमेरिका आने की कोशिश कर रहे शर्णार्थियों के लिए जिस तरह की सख्त जांच प्रक्रिया की बात कर रहे हैं वो पूरी तरह से उसके हक में हैं। कहते हैं, “मैं खुद भी एक अमेरिकी हूं और मेरी समझ से सबसे ऊपर अमेरिका को रखने की जरूरत हैं। मैं नहीं चाहता हूं कि कोई भी यहां घुस आए और अमेरिका के खिलाफ काम करे।” उनका कहना है कि ट्रंप ने अमेरिकी लोकतंत्र को एक नई दिशा देने की कोशिश की है क्योंकि वो अपने चुनाव प्रचार में न तो किसी का पैसा ले रहे हैं और न ही अपना मतलब निकालने की कोशिश कर रहे किसी गुट का साथ दे रहे हैं।



इंदौर से तीस साल पहले अमेरिका आकर बसे जसदीप सिंह की सोच उनसे मिलती-जुलती है। उन्होंने अमेरिकन सिख्स फॉर ट्रंप (American Sikhs for Trump) की शुरूआत की है।
कहते हैं, “तीस साल पहले जो अमेरिका मैने देखा था वो अब नहीं नजर आता। ट्रंप अमेरिका को फिर से महान बनाने की बात कर रहे हैं और मैं पूरी तरह से उनके साथ हूं।” उनका कहना है ट्रंप कानूनी तरीके से अमेरिका आनेवालों का विरोध नहीं कर रहे, वो सिर्फ गैर-कानूनी तरीके से यहां आए लोगों के खिलाफ हैं। सिंह का कहना है, “उनका भारत समेत दुनिया भर के देशों में कारोबार है। वो दूसरे देशों और संस्कृतियों को जितना बेहतर समझते हैं उतना कोई उम्मीदवार नहीं समझता।” ज्यादादातर अमरीकी सिख या मुसलमान जसदीप सिंह या साजिद तरार की बातों से शायद ही सहमत हों और दोनों को इस बात का एहसास भी है। लेकिन उनका कहना है कि ट्रंप जब रिपबलिकन उम्मीदवार घोषित कर दिए जाएंगे तब लोगों को समझ में आएगा कि जो बातें वो कर रहे हैं वो गलत नहीं हैं।
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