अमेरिका में सरकारी वकीलों ने बताया है कि साइबर अपराधियों ने प्रीपेड डेबिट कार्ड के डाटाबेस में हैकिंग कर और दुनिया भर में एटीएम मशीनों को खाली चार करोड़ पचास लाख डॉलर चुरा लिए हैं।
न्यूयॉर्क में सात लोगों पर आरोप तय किए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि आठवें संदिग्ध की हत्या हो गई है।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के मुताबिक ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में बैंको को निशाना बनाने के लिए फर्ज़ी कार्डों का इस्तेमाल किया।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि जापान, कनाडा, ब्रिटेन, रोमानिया समेत 12 देशों की जांच एजेंसियों की मदद ली जा रही है।
लैपटॉप से चोरी
एक बयान में कहा गया है, "बचाव पक्ष ने 21वीं सदी की बेहद बड़ी चोरी में हिस्सा लिया जो दुनिया भर में फैली थी। बंदूकों और मास्क की जगह इन साइबर अपराधियों ने लैपटॉप और क्लिक करें इंटरनेट का इस्तेमाल किया।"
माना जा रहा है कि इस गैंग के लोगों ने कथित तौर पर कम्प्यूटर सिस्टमों में हैकिंग की ताकि प्रीपेड डेबिट कार्डों का डाटा चुराया जा सके। इसकी मदद से इन लोगों ने कार्ड से पैसे निकालने की सीमा ख़त्म कर दी।
इसके बाद इन सूचनाओं को उन्होंने दुनियाभर में फैले अपने साथियों को दे दिया जिन्हें कैशर्स कहा जाता है। इन सूचनाओं के आधार पर अन्य मैगनेटिक स्ट्राइप वाले कार्डों में चुराया हुआ डाटा डाल दिया और इसके ज़रिए बहुत अधिक पैसे निकाले।
पिछले साल दिसबंर में पहला कथित छापा संयुक्त अरब अमिरात के राकबैंक में पड़ा। इन अपराधियों ने दुनिया के क़रीब 20 देशों से 4500 ट्रांज़ेक्शन से क़रीब पचास लाख डॉलर की रकम निकाल ली।
अभियोजकों का मानना है कि इस समूह का पता इस साल फ़रवरी में ओमान के बैंक ऑफ़ मस्कट में चला। ‘कैशर्स’ ने दस घंटे में कई एटीएम से चार करोड़ डॉलर निकाल लिए।
कार के शौकीन
न्यूयार्क के एक प्रतिवादी के मुताबिक़, उन्होंने मियामी के बैंक में खाता खोला और पैसों को कार और रोलेक्स घड़ियां खरीदने में लगाया। इन लोगों ने पोर्श और मर्सडीज बैंक जैसी गाड़ियां खरीदीं।
सात लोग उपकरणों तक पहुंच बनाकर धोखाधड़ी करने और काले धन को सफ़ेद करने के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
अभियोजको का कहना है कि इस समूह के कथित सरगना की डोमनिक गणराज्य की राजधानी में एक हफ्ते पहले हत्या हो गई थी।