वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे पेड़ों और घास से बने ग्रीन कार टायर का सपना जल्द ही सच हो जाएगा। इस नई तकनीक में हमारे मैदानों में मौजूद और दोबारा उपयोग में आ सकने वाले सामानों का उपयोग कर ऑटोमोबाइल टायर में एक महत्वपूर्ण अणु उत्पन्न किया जाएगा।
परंपरागत कार के टायरों को पर्यावरणीय दृष्टि से नुकसानदायक माना जाता है क्योंकि इनमें जीवाश्म ईंधन का प्रयोग किया जाता है। बायोमास से बने नए कार टायर जिनमें पेड़ और घास मिले होते हैं, मौजूदा कार टायरों की तरह ही रासायनिक मेकअप, रंग, आकार और परफॉर्मेंस में समान होंगे।
अमेरिका के मिनिसोटा यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर पॉल डुएनहावर ने कहा कि हमारी टीम ने एक नए रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा कार टायर में प्रयोग होने वाला महत्वपूर्ण अणु ‘आइसोप्रिन’ बनाया है। हमने इसे प्राकृतिक तत्वों जैसे पेड़, घास या फसलों से बनाया है। उनका कहना है कि यह शोध अरबों डॉलर के ऑटोमोबाइल उद्योग पर अपना बड़ा प्रभाव छोड़ेगा। यह शोध एसीएस कैटालिसिस पत्रिका में प्रकाशित हुआ।