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नेत्रहीन भी चला सकेंगे कार?

Mon, 15 Apr 2013 10:54 AM IST
बीबीसी हिंदी/डेमन रोज
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क्या पूरी तरह से नेत्रहीन व्यक्ति कभी कार चला सकते हैं? ऑटोमेटेड ड्राइविंग यानि अपना रास्ता ख़ुद तय करने में सक्षम कार बनाने की दिशा में जिस गति से काम चल रहा है, उससे तो ये संभव लगता है।
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गूगल ने पिछले साल इसी समय एक वीडियो जारी किया था जिसमें एक नेत्रहीन को कार चलाते दिखाया गया था। वो बिना किसी परेशानी के कार चलाते हुए कैलिफोर्निया के सैन जोस में अपने घर से निकलकर पास के एक रेस्त्रां में जाता है और फिर वापसी में ड्राई क्लीन किए हुए कपड़े लेता है।

उस वीडियों में ड्राइवर बने स्टीव मैहन, 'सांता क्लारा वैली ब्लाइंड सेंटर' के प्रमुख हैं। आठ साल पहले उनकी आंखों की 95 प्रतिशत रोशनी चली गई थी और उन्हें अपने लाइसेंस से हाथ धोना पड़ा था। तबसे वो चालक की सीट में नहीं बैठे थे।
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लेकिन वीडियो में इस बार उन्होंने केवल एक बटन दबाया और बाकी का काम कार ने खुद किया। वीडियो का मकसद ये संदेश देना था कि ड्राइविंग सभी के लिए आसान और सुरक्षित होनी चाहिए।

मैहन ने कहा, “चालकविहीन कारों को लेकर नेत्रहीनों में काफी उत्साह और चर्चा है। अमेरिका में ड्राइविंग लाइसेंस पाना इस बात का प्रतीक है कि आपको कहीं भी जाने की आज़ादी है।”

जरूरत
अमेरिका में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बहुत विकसित नहीं है। ऐसे में कार नहीं होने से आप अलग-थलग पड़ जाते हैं और आपकी दुश्वारियां बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि ये नेत्रहीनों के लिए एक भावनात्मक मुद्दा है।

चालकविहीन कार जीपीएस, लेजर, राडार और थ्री डी डेटा का इस्तेमाल करती है। 60 साल के मैहन को पूरा भरोसा है कि उनके जीवनकाल में ही नेत्रहीनों के लिए कार का सपना साकार हो जाएगा।

गूगल की ऑटोमेटेड कारें 3,00,000 मील का सफर तय कर चुकी हैं और वो भी बिना किसी दुर्घटना के।

'इंगमार पोस्नर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय' के मोबाइल रोबोटिक्स ग्रुप में इंजीनियर हैं। ये एक इंजीनियरिंग टीम है जो ऐसी कार बनाने में जुटे हैं जो आंशिक स्वचालन से चालक का काम आसान कर देगी।

उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि आप कार से एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। आपके डैशबोर्ड पर एक प्रकाश पुंज उभरता है और कहता है कि मैं जानता हूँ कि इस समय मैं कहां पर हूँ। हमने कितनी दूरी तय कर ली है। अगर आप चाहे तो अगले 500 मीटर मैं संभाल सकता हूँ।”

कई कंपनियां कर रही हैं कोशिश
पूरी तरह स्वचालित वाहन की कल्पना सबका ध्यान आकर्षित करती है। ये ऐसा वाहन होगा जिस पर आप अख़बार पढ़ते और चाय की चुस्की लेते हुए घर से ऑफिस जा सकेंगे। लेकिन ऐसी कार बाज़ार में जल्द उपलब्ध होने वाली नहीं है।

लेकिन ट्रैफिक जाम में कार को नियंत्रित करने और आपको लेन मार्किंग के भीतर रखने जैसे छोटे मोटे काम करने वाली कारें बाजार में उपलब्ध हैं या आने वाली हैं। टोयोटा, मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और अन्य कंपनियां ऐसी कारें बना रहे हैं।

पोस्नर ने कहा कि उनकी कार को बाज़ार में आने में दस से 15 साल का समय लग सकता है लेकिन पूरी तरह से नेत्रहीन लोग फिर भी इस कार को नहीं चला सकेंगे। उनका मानना है कि उनकी कार के आने से कई ऐसे लोग भी कार चला सकेंगे जो अभी किसी कमजोरी के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मेरी कल्पना अगर साकार होती है तो उन लोगों की बड़ी मदद होगी जिन्हें रात में वाहन चलाने में दिक्कत आती है। आजकल ऐसी कारें आ रही हैं जो पैदल यात्रियों की चहलकदमी को भाँप सकती हैं। पूरी तरह स्वचालित कारों के आने से इस बात का फ़र्क मिट जाएगा कि शारीरिक रूप से सक्षम हैं या नहीं।”

सपना
बहुत कम लोग इस बात से सहमत होंगे कि नेत्रहीनों को सड़क पर वाहन चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन मैहन का मानना है कि कारों में स्वचालित खूबियां आने से उनका वाहन चलाने का सपना साकार हो सकेगा।

उन्होंने कहा, “ये होगा कि लोगों को नेत्रहीनों के कार चलाने पर तो आपत्ति होगी लेकिन उन्हें ऐसी स्वचालित कारों से कोई दिक्कत नहीं होगी जो नेत्रहीन चलाएंगे।”

हालांकि वो साथ ही मानते हैं कि केवल स्वचालित कार ही उनकी सभी चुनौतियों को दूर नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा, “कार के अपने आप पार्क होने के बाद उससे बाहर निकलने और अपने गंतव्य तक पहुंचने में तो दिक्कत रहेगी।”
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