दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रही वर्चुअल करेंसी बिटक्वाइन की माइनिंग (निर्माण प्रक्रिया) और लेन-देन में बेहद बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है। वेनेजुएला में बिटक्वाइन के चलते बिजली कटौती बढ़ गई है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तेजी से बिटक्वाइन की लोकप्रियता में इजाफा होता रहा तो साल 2020 तक इस करेंसी को पूरी दुनिया से ज्यादा बिजली की जरूरत होगी। यानी बिटक्वाइन की रफ्तार से बिजली उत्पादन नहीं बढ़ा तो दुनिया की आधी बिजली यही खर्च कर देगी।
विश्लेषण फर्म डिगइकोनोमिस्ट के मुताबिक हर बिटक्वाइन की लेन-देन में इतनी ऊर्जा खर्च होती है, जितनी अमेरिका के नौ घरों में एक दिन में क्योंकि हर एक व्यक्ति के पास से दूसरे के पास जाने में इसे कई कंप्यूटर कोड से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा बिटक्वाइन नियंत्रित करने वाले माइनर्स कई गणना करते हैं, जिससे पता चले कि वर्चुअल करेंसी की लेन-देन सही है या नहीं।
यह एक कोड तोड़ने जैसी प्रक्रिया है, जिसमें 1.7 अरब से ज्यादा गणना होती है। इस कंप्यूटर प्रक्रिया में भी काफी बिजली खर्च होती है। चीन में स्थित बिटक्वाइन सेंटर में दुनिया के आधे बिटक्वाइन माइनर्स हैं। यहां हर वक्त 25 हजार कंप्यूटर चलते हैं और 40 लाख रुपये का बिजली का बिल रोज आता है। इससे बिजली खपत का अनुमान लगाया जा सकता है।
पिछले कुछ महीने में बिटक्वाइन तेजी से बढ़ा है। क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क के लिए बिजली की मांग में भी इजाफा हुआ है। जैसे-जैसे इस तकनीक का विस्तार होगा। ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा। 2019 तक बिटक्वाइन नेटवर्क को अमेरिका की बिजली की खपत के बराबर ऊर्जा चाहिए होगी और 2020 तक पूरी दुनिया के बराबर।
एरिक होल्थास, तकनीकी विशेषज्ञ, अमेरिका
एक देश से ज्यादा ऊर्जा खपत है बिटक्वाइन की
मौजूदा समय में बिटक्वाइन हार्डवेयर 31 टेरावॉट ऑवर्स ऊर्जा हर साल खर्च कर रहा है। जबकि पूरे आयरलैंड में एक साल में 23 टेरावॉट बिजली खर्च होती है और ब्रिटेन में 309 टेरावॉट। दावा है कि बिटक्वाइन अभी 159 छोटे देशों से ज्यादा बिजली खर्च कर रहा है।