अगले सप्ताह होने जा रही पहली भारत-अमेरिका टू प्लस टू वार्ता से ठीक पहले मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ट्रंप ने नई दिल्ली पर अमेरिकी उत्पादों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने का आरोप लगाया। साथ ही इस शुल्क को हटाने की मांग की।
ट्रंप ने ये आरोप तब लगाए, जब वे विदेशी उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के अपने हालिया निर्णय को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। ट्रंप ने अपने निर्णय को सही बताते हुए बहस की कि अमेरिका इस शुल्क बढ़ोतरी के जरिए भारत, चीन और यूरोपियन संघ समेत अपने मुख्य व्यापारिक साझीदारों के साथ व्यापार संतुलन बना रहा है।
विशेषज्ञों का आकलन, टू प्लस टू वार्ता हटाएगी भारत-अमेरिका का वर्तमान गतिरोध
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अगले सप्ताह अपने अमेरिकी समकक्षों माइक पोम्पियो और जेम्स मैटिस के साथ पहली टू प्लस टू वार्ता में हिस्सेदारी करेंगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वार्ता से वर्तमान द्विपक्षीय संबंधों के आसपास आर्थिक और व्यापारिक विवादों के कारण बन गए वर्तमान गतिरोध को हटाने में मदद मिलेगी।
पिछले साल जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच टू प्लस टू वार्ता शुरू करने की घोषणा की गई थी। वाशिंगटन में 6 जुलाई को होने जा रहे इस वार्ता के पहले संस्करण में सुषमा और सीतारमण की मेजबानी पोम्पियो और मैटिस करेंगे। ये वार्ता ऐसे समय में होने जा रही है, जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है। अमेरिका की तरफ से भारत समेत कई देशों से आयात किए जाने वाले लोहा व एल्युमीनियम पर भारी शुल्क लगाने के जवाब में भारत ने भी पिछले सप्ताह 29 अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने की योजना पेश की थी।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, दोनों देशों के इन चार कैबिनेट मंत्रियों की मुलाकात के दौरान कई रणनीतिक मुद्दों पर वार्ता होनी है। इनमें रक्षा से जुड़े हुए मुद्दे, ट्रंप प्रशासन की इंडो-पैसेफिक क्षेत्र और दक्षिण एशिया नीति में भारत की अहम भूमिका जैसे मुद्दे शामिल हैं। ये दोनों देशों के बीच इस साल की सबसे बड़ी वार्ता होने जा रही है।
वार्ता से विशेषज्ञों को है बड़ी आशा
पिछले कुछ महीने भारत-अमेरिका प्रतिबंधों से बने हालात, शुल्क बढ़ोतरी अैर अन्य आर्थिक व व्यापारिक विवादों में ही उलझे रहे। ये वार्ता उन्हें रणनीतिक मुद्दाें पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देगी, जो सही मायने में दोनों देशों की साझेदारी की रीढ़ है। उम्मीद है कि आतंक का मुकाबला, साइबर सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे वार्ता में ज्यादा अहमियत हासिल करेंगे।
अनीश गोयल, पूर्व वरिष्ठ निदेशक, व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल
पिछले कुछ सालों में पहली बार भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंधों में गड़बड़ी की अवधि ने मुझे चिंतित किया है। मुझे आशा है कि ये परदे के पीछे ही रहेगा और रणनीतिक समझौतों पर अहम व तत्काल सहयोग की आवश्यकता को प्रभावित नहीं करेगा।
अलीशा एरिस, अमेरिकी विदेश विभाग की पूर्व अधिकारी
टू प्लस टू वार्ता को हमारी (भारत-अमेरिका की) रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने के रास्ते सुनिश्चित करने चाहिए और हमारे भरपाई न होने लायक नुकसान उठाने से पहले हमारे आर्थिक संबंधों में आ रही गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।
- रिकी रोस्सो, सदस्य, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज