अमेरिकी कांग्रेस ने पाक को आर्थिक मदद राशि में 55 करोड़ डॉलर की बड़ी कटौती कर दी है। यह कार्रवाई पाक में चल रहे आतंकी नेटवर्क पर प्रतिबंध नहीं लगाने के चलते की गई है। इमरान खान के पीएम बनने से ठीक पहले आर्थिक संकट में फंसे पाक के लिए यह बुरी खबर इसलिए भी है क्योंकि यदि अब उसे आईएमएफ से मदद नहीं मिली तो पाक के पास आयात की रकम तक नहीं बचेगी और उस पर दिवालिया होने का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि पाक को अब अमेरिकी मदद के लिए आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई के सबूत नहीं देने होंगे।
अमेरिकी कांग्रेस ने पाक को दी जाने वाली 70 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद घटाकर सिर्फ 15 करोड़ डॉलर कर दी है। यह इस्लामाबाद में नई सरकार के गठन से ठीक पहले पाक को अमेरिका का एक बड़ा झटका है, क्योंकि यदि इमरान खान सरकार बनाते हैं तो उनका सबसे पहला सामना देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से होगा। इमरान ने भले ही आईएमएफ से बेलआउट पैकेज मांगने की योजना बनाई है लेकिन अमेरिका ने पहले ही उसमें अड़ंगा लगा दिया है। ऐसे में आईएमएफ से मदद न मिलने पर पाक के दिवालिया होने का खतरा बढ़ जाएगा।
हालांकि पाक को अमेरिकी कांग्रेस ने एक बड़ी छूट भी दे दी है। उसे अब अमेरिकी मदद हासिल करने के लिए आतंकवादी हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-ताइबा के खिलाफ कार्रवाई करने के सबूत नहीं देने होंगे। अमेरिका ने वित्त वर्ष 2019 के लिए जॉन एस. मैक्केन नेशनल डिफेंस ऑथराइेशन एक्ट (एनटीएए) रक्षा विधेयक में पाक से आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की पूर्व शर्त को हटा लिया है। व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व सदस्य अनीश गोयल ने कहा कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अब आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाक पर दबाव नहीं बना सकेगा।