कुण्डली में सप्तमेश व्यय भाव में तथा सप्तमभाव का नैसर्गिक कारक रन्ध्र भाव में राहु से युत होने के कारण वैवाहिक जीवन में बाधा है। कुण्डली में पंचमेश त्रिक भाव में होने के कारण संतान सुख भी प्रबल नहीं है।
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फरवरी 15 तक चल रहा दशाक्रम भी आपके प्रतिकूल है। इच्छा पूर्ति के लिए शुक्ल पक्ष में बुधवार से प्रारंभकर नित्य श्री गणेश जी की उपासना करें। प्रत्येक मंगलवार गाय को गुड़ की डली खिलाएं।