अमेरिका के एक शीर्ष सीनेटर ने आगाह किया है कि जलवायु परिवर्तन का हिमालय पर प्रतिकूल भू-राजनीतिक प्रभाव पड़ रहा है, विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच के क्षेत्र में जहां जल प्रवाह में अस्थिरता क्षेत्र में विवाद का कारण बन सकती है, यहां तक कि तबाही भी ला सकती है।
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सीनेटर शेलडन ने वाशिंगटन में इस हफ्ते हुए एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पाकिस्तान की सभी प्रमुख नदियों में पानी भारत में ग्लेशियर के पिघलने से आता है, ज्यादा मात्रा में ग्लेशियर के पिघलने का अर्थ है ज्यादा बहाव।
इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के मौसम में बारिश और रौद्र रूप ले सकती है। एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर वर्ष 2100 तक एक तिहाई से ज्यादा पिघल सकते हैं।
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पिघलने के कारण ग्लेशियर भी सिकुड़ते जा रहे हैं। अमेरिका के शीर्ष थिंकटैंक हडसन इंस्टीट्यूट में ‘एन इंटीग्रेटेड अप्रोच टू हिमालयाज’ विषय पर एक रिपोर्ट को जारी करने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में यह जानकारी दी।