दुनिया में कई देशों में प्रसूति विशेषज्ञ नवजात के जन्म के तुरंत बाद उसकी ‘गर्भनाल’ को काट देते हैं। जबकि भारत में बहुत पहले दाईयां घरों के भीतर प्रसव कराते वक्त इसे तुरंत अलग करने के बजाय थोड़ी देर तक रक्त संचार जारी रहने के बाद धागे से मजबूती के साथ बांध देती थीं। इसके धीरे-धीरे सूखने के बाद शिशु और मां अलग हो जाते थे।
अब अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भारत की इस प्रणाली पर मुहर लगाते हुए दुनिया के डॉक्टरों को सलाह दी है कि वे नवजात के पैदा होने के तुरंत बाद ‘गर्भनाल’ काटने के बजाय थोड़ा इंतजार करें, ताकि उसमें आयरन की कमी न हो पाए।
अमेरिका के बड़े मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन ‘कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रीशियंस एंड गायनेकॉलॉजिस्ट’ ने डॉक्टरों से औपचारिक रूप से यह सिफारिश की है कि वे ‘गर्भनाल’ को कसने और काटने से पहले नवजात में कुछ देर तक खून का प्रवाह जारी रहने दें, ताकि शिशु में आयरन की कमी न आ पाए और आगे चलकर बच्चे का मस्तिष्क सही ढंग से विकसित हो सके। संगठन ने सामान्य व सर्जरी दोनों तरह के प्रसव के लिए बाकायदा डॉक्टरों को हिदायत भी दी है।
हालांकि संगठन के डॉक्टर 2012 में ही इस तथ्य पर पहुंच चुके थे, लेकिन तब उनके पास अपनी बात को कहने का कोई प्रमाण नहीं था। अमेरिका के विस्कॉन्सन प्रांत स्थित मार्शफील्ड की विशेषज्ञ डॉ. मारिया मस्कोला ने कहा अब हमारे पास इस बात के ढेर सारे वैज्ञानिक प्रमाण एकत्रित हो चुके हैं। इस सिफारिश पर अमेरिका के अन्य मेडिकल समूहों ने भी मुहर लगाई है।